सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा, गिरिडीह में भक्ति और संस्कारों की त्रिवेणी -छठ गीत,दीपावली और श्रीराम -सीता की झांकी
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा, गिरिडीह में भक्ति और संस्कारों की त्रिवेणी -छठ गीत,दीपावली और श्रीराम -सीता की झांकी
*गिरिडीह,
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा, गिरिडीह में वंदना सभा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अभिभाविका
श्वेता देवी ने शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि श्वेता व मेनका के साथ कक्षा षष्ठ से दशम की सभी बहनों ने सामूहिक वंदना की। वंदना के उपरांत मेनका ने मुख्य अतिथि का आत्मीय परिचय कराकर उनका अभिनंदन किया, जबकि सरिता बर्णवाल ने अंगवस्त्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
वंदना सभा के दो मुख्य आकर्षण रहे। प्रथम, बहनों द्वारा प्रस्तुत छठ महापर्व की मनमोहक झांकी। बहनों ने पारंपरिक परिधान में सुसज्जित होकर ‘केलवा जे फरेले घवद से’ और ‘उगs हो सूरज देव’ जैसे सुमधुर छठ गीतों का गायन किया तथा बांस के सूप में ठेकुआ, फल-फूल सजाने और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण करने की पारंपरिक विधि का जीवंत प्रदर्शन कर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
द्वितीय आकर्षण शिशु वर्ग के नन्हे भैया-बहनों की प्रस्तुति रही। दीपावली के पावन अवसर पर नन्हे बच्चे सीता-राम के मनोहारी रूप में सज-संवर कर आए, जिन्होंने सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य आनंद कमल एवं प्रवासी कार्यकर्ता सलमान होजाई की गरिमामयी उपस्थिति रही।प्रधानाचार्य आनंद कमल ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार और भारतीय संस्कृति का केंद्र है। छठ जैसे महापर्व हमें प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाते हैं, वहीं दीपावली हमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से जोड़ती है। बहनों और शिशु वर्ग द्वारा प्रस्तुत यह झांकी अत्यंत सराहनीय है। हमारा प्रयास है कि हमारे बच्चे आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी लोक परंपरा से भी जुड़े रहें।
मुख्य अतिथि श्वेता देवी ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय में इस प्रकार के संस्कार देखकर वे अत्यंत हर्षित हुईं। मौके पर सभी आचार्य जी, दीदी जी एवं भैया-बहन उपस्थित थे।

