महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सतबरवा प्रखंड में धूमधाम से मनाया गया मेला दोगोला
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सतबरवा प्रखंड में धूमधाम से मनाया गया मेला दोगोला
सतबरवा (पलामू, झारखंड), महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सतबरवा प्रखंड के विभिन्न स्थानों पर भक्ति और उत्साह का माहौल छाया रहा। स्थानीय परंपराओं को जीवंत करते हुए लोहरा पोखरी स्थित शिव मंदिर के प्रांगण में तथा बोहिता-राजहरा के सिवाना क्षेत्र में स्थित चमरुआ पहाड़ पर प्रसिद्ध मेला दोगोला (दुगोला/दोगुला) का भव्य आयोजन किया गया।
इस पारंपरिक मेले का शुभारंभ सतबरवा प्रखंड के उप प्रमुख कामख्या नारायण यादव ने रिबन काटकर किया। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय निवासी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। उप प्रमुख कामख्या नारायण यादव ने अपने संबोधन में कहा, “यदि धवाडिह पंचायत के जनता-जनार्दन मुझे एक बार सेवा का अवसर प्रदान करते हैं, तो मैं निश्चित रूप से इस पंचायत को जिला स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर नंबर वन बनाऊंगा। यदि ऐसा नहीं कर पाया, तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा।” उन्होंने विकास और सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम के दौरान भक्ति भजनों, कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। मेले में दोगोला (दो गोला) के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।
मेला दोगोला केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित होता है। यहां स्थानीय कारीगर, व्यापारी और कलाकार अपनी आजीविका चलाते हैं तथा सदियों पुरानी परंपराओं को जीवंत रखते हैं। चमरुआ पहाड़ और लोहरा पोखरी शिव मंदिर क्षेत्र महाशिवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से हमेशा गूंजते हैं, और इस वर्ष भी यह परंपरा बरकरार रही।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथियों में विधायक प्रतिनिधि *अजय उरांव, राज्य सभा सदस्य (कमिटी) **अवधेश सिंह चेरो, सांसद प्रतिनिधि *धीरज कुमार, अनुज चंद्रवंशी, डॉ. शमीम, कमलेश सिंह, संजय यादव, संतोष साहू, कर्मचंद साहू, सत्य प्रकाश साहू, मुधिर साहू सहित कई पंचायत पदाधिकारी और सम्मानित नागरिक शामिल हुए।
यह आयोजन सतबरवा प्रखंड की सांस्कृतिक एकजुटता, धार्मिक श्रद्धा और सामुदायिक सद्भाव को दर्शाता है, जो पलामू जिले की पहचान का अभिन्न अंग है। महाशिवरात्रि के इस उत्सव ने एक बार फिर स्थानीय समुदाय की जीवंत परंपराओं को नई ऊर्जा प्रदान की।

