मानसून की बेरुखी से झारखंड में सूखे के हालात, पूरे राज्य को सुखाड़ घोषित करने की मांग

मानसून की बेरुखी से झारखंड में सूखे के हालात, पूरे राज्य को सुखाड़ घोषित करने की मांग

रालोजपा प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राज ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज और किसानों के लिए विशेष सहायता की उठाई मांग

रांची/गिरिडीह : झारखंड में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण धान की रोपनी बुरी तरह प्रभावित हुई है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं, जलाशयों का जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है और वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार जुलाई का अधिकांश समय बीत जाने के बावजूद झारखंड में वर्षा सामान्य से काफी कम दर्ज की गई है। कई जिलों में 30 से 50 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जबकि राज्य स्तर पर भी संचयी वर्षा सामान्य से काफी नीचे बनी हुई है। पूरे देश में भी जुलाई के लिए सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान पहले ही जारी किया गया था।

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राज ने राज्य सरकार से अविलंब पूरे झारखंड को “सुखाड़ग्रस्त” घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और खाद्यान्न उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

राजकुमार राज ने सरकार से मांग की है कि किसानों को तत्काल राहत पैकेज दिया जाए, फसल क्षति का सर्वे कराया जाए, सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, बिजली आपूर्ति बढ़ाई जाए तथा कृषि ऋण की वसूली पर रोक लगाने के साथ-साथ किसानों को आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और ऐसे समय में सरकार को संवेदनशीलता के साथ त्वरित निर्णय लेना चाहिए।

रोपनी पर सबसे अधिक असर

राज्य में धान की खेती मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में किसान अब तक रोपनी शुरू नहीं कर सके हैं, जबकि जहां रोपनी हुई भी है वहां पौधे सूखने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।

राज्य के किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि झारखंड की खरीफ फसल संकट से उबर पाएगी या सरकार को सूखे की औपचारिक घोषणा कर व्यापक राहत उपाय लागू करने पड़ेंगे।