कठौतिया मलय डैम की मुख्य नहर टूटने से सिंचाई संकट, किसानों में बढ़ी चिंता

पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड अंतर्गत कठौतिया मलय डैम की मुख्य नहर (चैन संख्या-18) टूट जाने से क्षेत्र के हजारों किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इस संबंध में राज्य स्तरीय दिशा समिति, झारखंड के सदस्य अवधेश सिंह ने संबंधित विभाग से अविलंब मरम्मत कराने की मांग की है। और साथ ही पांकी विधायक डाक्टर कुशवाहा डॉक्टर शशिभूषण मेहता को ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने बताया कि यह डैम भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। मुख्य नहर 10 नवंबर 2025 को टूट गई थी, लेकिन लगभग सात से आठ माह बीत जाने के बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण इसकी मरम्मत अब तक नहीं कराई गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस डैम से सतबरवा प्रखंड के 27 गांव, मेदिनीनगर प्रखंड के 42 गांव तथा लेस्लीगंज प्रखंड के 36 गांवों के करीब 19,200 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती थी। नहर टूटने के बाद खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे आगामी खरीफ फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि रबी फसल भी प्रभावित हुई, लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है।

अवधेश सिंह ने आरोप लगाया कि विभाग को टेलीफोन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से कई बार जानकारी दी जा चुकी है, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जहां नहर टूटी है, वहां से पानी की धारा मोड़कर लाखों क्यूसेक लीटर पानी मलय नदी में बहा दिया जा रहा है, जिससे सिंचित क्षेत्रों में पानी की किल्लत बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि यह सिंचित क्षेत्र पलामू लोकसभा एवं चतरा लोकसभा क्षेत्र के डालटनगंज, भंडरिया, पांकी और मनिका विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आता है। अंत में उन्होंने किसानों के हित में प्राथमिकता के आधार पर नहर की मरम्मत कराने की मांग की है।