शिक्षा बचाओ आंदोलन के समर्थन में पलामू में संयुक्त प्रदर्शन, छात्र दमन का विरोध

शिक्षा बचाओ आंदोलन के समर्थन में पलामू में संयुक्त प्रदर्शन, छात्र आंदोलन पर दमन की निंदा

पलामू, 20 जुलाई। देशभर में शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली तथा छात्रों पर हो रहे दमन के खिलाफ चल रहे शिक्षा बचाओ आंदोलन के समर्थन में सोमवार को पलामू जिला मुख्यालय के छह मुहान चौक पर भाकपा माले, आइसा, आरवाईए, आम आदमी पार्टी, संविधान बचाओ मोर्चा एवं जन संग्राम मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन की शुरुआत रिक्शा पड़ाव से प्रतिरोध मार्च के साथ हुई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए छह मुहान चौक पहुंचा। यहां आयोजित सभा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा एवं छात्र विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की।

सभा की अध्यक्षता करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव रविंद्र भुइयां ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था आज गंभीर संकट से गुजर रही है। लगातार पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितता और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विफलता और सरकारी लापरवाही उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है।

उन्होंने कहा कि इन गंभीर मुद्दों को उठाने वाले छात्रों के साथ संवाद करने के बजाय केंद्र सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ना, पानी की बौछार करना और बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए, न कि उन्हें अपराधियों की तरह दबाने का प्रयास करना चाहिए।

रविंद्र भुइयां ने कहा कि पिछले 22 दिनों से पर्यावरणविद सोनम वांगचुक तथा छात्र नेता नेहा, मनीष और आमीन सहित कई आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इतने लंबे समय तक आंदोलन जारी रहने के बावजूद सरकार द्वारा सार्थक वार्ता नहीं करना उसकी असंवेदनशीलता और अहंकारी रवैये को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को कुचलने के लिए अनशनकारियों को जबरन हटाने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। लोकतंत्र में जनता की आवाज को बलपूर्वक दबाना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

जन संग्राम मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष युगल पाल ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार लगातार जनविरोधी नीतियों को लागू कर रही है। पहले किसानों की आवाज को दबाया गया, फिर मजदूरों की मांगों की अनदेखी की गई और अब छात्रों के भविष्य पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। लाखों युवा रोजगार की उम्मीद में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षाएं ही निष्पक्ष नहीं होंगी और बार-बार पेपर लीक होंगे, तब युवाओं का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?

उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। यदि शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से ग्रस्त होगी तो देश का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा। सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता यह साबित करती है कि वह शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और सरकार को तत्काल उनसे संवाद स्थापित कर ठोस समाधान प्रस्तुत करना चाहिए।

आम आदमी पार्टी के नेता सुधीर कुमार ने कहा कि शिक्षा बचाओ आंदोलन आज पूरे देश के छात्र-युवाओं की आवाज बन चुका है। दिल्ली में चल रहा आंदोलन यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि अब देश का छात्र समुदाय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है और लोकतांत्रिक तरीके से अपने भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार छात्रों की मांगों पर विचार करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने में लगी हुई है। पर्यावरणविद सोनम वांगचुक जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और समाजसेवी पर सवाल खड़े करना तथा आंदोलन में शामिल छात्रों को विदेशी एजेंट या राष्ट्रविरोधी बताना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करने का प्रयास है। असहमति को देशद्रोह बताना लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है।

सुधीर कुमार ने कहा कि विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। लेकिन दमन और भय के माध्यम से छात्रों की आवाज को लंबे समय तक नहीं दबाया जा सकता। शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए देशभर में चल रहा यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक होगा।

सभा में उपस्थित नेताओं ने संयुक्त रूप से मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, पेपर लीक की घटनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर सजा दी जाए, आंदोलनकारी छात्रों एवं भूख हड़ताल पर बैठे प्रतिनिधियों से सम्मानजनक वार्ता की जाए तथा छात्रों पर किए गए दमनात्मक कार्रवाई की न्यायिक जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

सभा के अंत में सभी संगठनों ने शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया तथा कहा कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक शिक्षा बचाओ आंदोलन के समर्थन में जन अभियान और जन आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
भाकपा माले से रामराज पासवान, पवन विश्वकर्मा, उमेश रवि, बलराम राम, नर्वदेश्वर सिंह, ललन प्रजापति, कार्तिक प्रजापति, जसीम अंसारी,आम आदमी पार्टी से कौशल किशोर बच्चन,चंद्रबली चौबे, संजय राम, लव तिवारी, गणेश चंद्रवंशी, मनोज रवि, आइसा के राज्य उपाध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह, जिला सचिव गौतम दांगी, अंशु प्रसाद, ममता कुमारी,ऋषि रौशन, अनुलाल बाबू समेत अन्य लोग मौजूद रहे।