मौसम की बेरुखी से अकाल की आशंका से सिहर उठे हैं किसान-रूचिर तिवारी
मौसम की बेरुखी से अकाल की आशंका से सिहर उठे हैं किसान-रूचिर तिवारी
मौसम की बेरुखी किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। आर्द्रा जैसे नक्षत्र में भी बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें टूट रहीं हैं और गर्मी से आम लोग परेशान हैं। बढ़ रही गर्मी और उमस से लोगों का हाल बेहाल है। मनुष्य ही नहीं, पशु पक्षी भी परेशान हैं। बारिश नहीं होने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। बारिश के लिए किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। खेतों में नमी के अभाव में धान का बिचड़ा पीले पड़ने लगे हैं। किसान पंपिंग सेट के सहारे फिलहाल किसी तरह से बिचड़े को बचाने में लगे हैं। वहीं सिंचाई के अभाव वाली जगहों पर धान का बिचड़ा लगाने की चिंता सताने लगी है। जिले के उत्तरी कोयल नहर में प्रत्येक वर्ष हुसैनाबाद क्षेत्र में आद्रा नक्षत्र में ही पानी छोड़ा जाता था।किंतु इस बार अभी मुख्य नहर में जीर्णोद्धार के कारण पानी काफी देर से छोड़ा गया।किसान बारिश के लिए आसमान निहार रहे हैं। आषाढ़ महीना बीतने व आद्रा जैसे नक्षत्र में भी बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही है। किसान सूखे की आशंका से सिहर उठ रहे हैं। इन्हें इस बार अच्छी खेती की उम्मीद नहीं दिख रही है। जिनके पास सिंचाई का साधन हैं, वही किसान किसी तरह से बिचड़ा लगाने और उसे बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिन किसानों के पास सिंचाई का साधन है उनलोगों ने रोहण नक्षत्र में ही धान का बिचड़ा लगा दिया था। इस बार रोहण नक्षत्र में भी बारिश नहीं होने के कारण किसानों को काफी निराशा हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान से किसानों को आद्रा नक्षत्र का साथ मिलने की आस जगी थी। किन्तु इस नक्षत्र में भी अपेक्षित बारिश नहीं होने से किसान अब मायूस होने लगे हैं। पुनर्वसु नक्षत्र भी समाप्त हो गया।अब सावन में भी जिले में मेघ नहीं बरस रहे हैं। मौसम विभाग द्वारा इस साल औसत से ज्यादा बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा था। मृगडाह नक्षत्र में हिट वेभ से किसान अच्छी बारिश की बात कह रहे थे। लेकिन किसानों की भविष्यवाणी अब निरर्थक साबित होती दिख रही है। मौसम अनुकूल नहीं रहने व शरीर को झुलसाने वाली धूप के कारण पम्प सेट के सहारे लगाए गए धान के बिचड़े में कई तरह के रोग लगने का डर किसानों को सता रहा है। किसानों ने कहा कि बारिश नहीं होने से धान का बिचड़ा विकास नहीं कर रहा है। किसानों ने कहा कि दो-चार दिनों के अंदर बारिश नहीं होने से धान की फसल के साथ-साथ भदई फसल पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि यदि अब भी मौसम साथ दे दे तो कृषि कार्य काफी हद तक पटरी पर आ जायेगा और सूखे की स्थिति टल जाएगी।
