दवा कारोबार में मचा हड़कंप! C.S. मेडिकल एजेंसी का थोक लाइसेंस रद्द, जांच में नियमों की अनदेखी का खुलासा

दवा कारोबार में मचा हड़कंप! C.S. मेडिकल एजेंसी का थोक लाइसेंस रद्द, जांच में नियमों की अनदेखी का खुलासा

औषधि निरीक्षक,गिरिडीह द्वारा जांच के क्रम में घोर अनियमितता पाए जाने पर हजारीबाग- III के सहायक औषधि नियंत्रक अमरेश कुमार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए जमुआ थाना क्षेत्र के मोहनोडीह स्थित सी एस मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए जमुआ थाना को पत्र लिख उक्त प्रतिष्ठान को तुरंत बंद करवाने के लिए निर्देश दिया है।

सहायक औषधि नियंत्रक की इस कारवाई से पूरे जिले के दवा दुकानदारों में हड़कंप है।

बताया गया है कि औषधि कारोबार में निर्धारित नियमों का पालन नहीं करना M/S C.S. Medical Agency, मोहनडीह चौक, मजार, जारूआडीह, जमुआ को भारी पड़ गया। औषधि निरीक्षक द्वारा की गई जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद एजेंसी के थोक औषधि लाइसेंस संख्या 133882 एवं 133883 (फॉर्म 20-B एवं 21-B) को रद्द कर दिया गया है।

सहायक निदेशक (औषधि) सह अनुज्ञापन प्राधिकारी, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल-III, हजारीबाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि 1 जुलाई 2026 को औषधि निरीक्षक, गिरिडीह द्वारा प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं।

विभागीय आदेश के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कुछ औषधियों के क्रय अभिलेख मांगे जाने के बावजूद प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके अलावा प्रतिष्ठान में स्टॉक रजिस्टर का संधारण नहीं किया जाना भी पाया गया। विभाग ने इसे औषधि एवं अंगराग अधिनियम, 1940 तथा संबंधित नियमों का उल्लंघन माना है।

आदेश में यह भी उल्लेख है कि प्रतिष्ठान द्वारा थोक औषधि लाइसेंस की शर्तों के विपरीत औषधियों की बिक्री की जा रही थी। विभाग ने एजेंसी से पिछले छह माह का क्रय-विक्रय विवरण उपलब्ध कराने को कहा था।

इसके बाद एजेंसी की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण की समीक्षा की गई। विभाग ने स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाया और कहा कि औषधियों का क्रय-विक्रय नियमों के अनुरूप नहीं किया गया, जो औषधि एवं अंगराग अधिनियम, 1940 की धारा 18(c) के प्रावधानों का उल्लंघन है।

इसके बाद औषधि एवं अंगराग अधिनियम, 1940 और निर्मित नियमावली 1945 के नियम 66(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए C.S. Medical Agency की अनुज्ञप्ति संख्या 133882 एवं 133883 को पत्र प्राप्ति की तिथि से रद्द कर दिया गया। साथ ही संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई किए जाने की बात भी आदेश में कही गई है।