“डॉ. हनीफ ने राज्यपाल को भेंट की ‘युद्ध और सफर’ की नेपाली और संथाली प्रति”
राज्यपाल झारखंड सरकार को डॉ हनीफ ने अपनी लिखी पुस्तक की भेंट।
अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार और वर्तमान में संताल परगना महिला कॉलेज दुमका मेंअंग्रेजी के सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत डॉ हनीफ बहुमुखी प्रतिभा के धनी और अंग्रेजी के साथ साथ हिंदी में लेखन करनेवाले एक लोकप्रिय शिक्षक हैं।हाल ही में उनकी पुस्तक युद्ध और सफर का नेपाली और संथाली में हुए अनुवाद की प्रति महामहिम को भेंट की।अपने बहुचर्चित उपन्यास एक खत तुम्हारे नाम भेंट करते महामहिम से इसे पढ़ने का आग्रह भी किया।यहां बताते चलें कि डॉ हनीफ अब तक हिन्दी और अंग्रेजी में कुल मिलाकर बीस पुस्तक लिख चुके हैं। कोराना काल में इनकी रचना ” कहीं तुम्हें नफरत न हो जाए ” पर शॉर्ट मूवी ( 39 मिनट) अंतरराष्ट्रीय फलक पर रह चुकी है।इनकी महत्वपूर्ण रचनाओं में हल्दी के रंग,काली बछिया,दर्द कहूं या पीड़ा,एक पिता का सच,आई एंड माई मदर ए गॉस्पेल, ए रोजरी ऑफ़ पोईजी,वार एंड जर्नी,चाहत, आंगन राख की सौगंध,पापा अब मैं कहां जाऊं काफी चर्चित रही।दुमका की जमीं को साहित्यिक उर्वरता प्रदान कर रहे डॉ हनीफ संताल परगना की एक पहचान हैं।इन्हें अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हैं।हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्डर डॉ हनीफ की पुस्तकों का इन दिनों कई भाषाओं में यथा उड़िया, बांग्ला और पॉलिश में अनुवाद भी हो रहा है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के टी वी चैनल पर इनकी कविता का पाठ भी हुआ है।महामहिम राज्यपाल ने डॉ हनीफ की प्रशंसा करते हुए इन्हें विश्वविद्यालय का एसेट बताया और इनकी रचना की सराहना की।

