नारायण सेवा समिति सतबरवा ट्रस्ट ने गरीबों के बीच बांटा भोजन
नारायण सेवा समिति सतबरवा ट्रस्ट द्वारा गरीबों के बीच भोजन वितरण
सतबरवा (पलामू): नारायण सेवा समिति सतबरवा ट्रस्ट की ओर से एक नेक पहल के तहत सतबरवा प्रखंड के दुलसूलमा पंचायत अंतर्गत अमझरिया टोला और हुड़मूड़ टोला के गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच भोजन का वितरण किया गया।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की टीम ने दोनों टोलों में पहुंचकर सैकड़ों गरीबों को पौष्टिक भोजन पैकेट वितरित किए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों तक मदद पहुंचाना था, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने में भी परेशानी का सामना करते हैं।
ट्रस्ट के संयोजक ने बताया, “नर सेवा ही नारायण सेवा है। हमारा विश्वास है कि गरीबों की सेवा करके हम भगवान की सच्ची सेवा करते हैं। अमझरिया और हुड़मूड़ टोला के निवासियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हमने यह छोटा सा प्रयास किया है। भोजन के साथ-साथ हमने उन्हें प्यार और सम्मान भी दिया।”
कार्यक्रम में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों की विशेष रूप से उपस्थिति रही। वितरित भोजन पैकेट में चावल, दाल, सब्जी, रोटी और कुछ मिठाई शामिल थी, ताकि लोग एक अच्छा भोजन कर सकें। स्थानीय लोगों ने ट्रस्ट की इस पहल की सराहना की और आभार व्यक्त किया।
एक लाभार्थी महिला ने भावुक होते हुए कहा, “हम लोग रोजगार की कमी से जूझ रहे थे। आज ट्रस्ट वालों ने घर-घर जाकर भोजन दिया। भगवान उनका भला करें।”
नारायण सेवा समिति सतबरवा ट्रस्ट पिछले कई वर्षों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय है। ट्रस्ट नियमित रूप से गरीब बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर, वृद्धजनों की मदद और आपदा राहत कार्यों में भाग लेता रहा है। इस बार दुलसूलमा पंचायत के इन दो टोलों को चुना गया क्योंकि यहां की स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बताई जा रही थी।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को जारी रखा जाएगा और धीरे-धीरे अन्य पंचायतों तक इसकी पहुंच बढ़ाई जाएगी। उन्होंने सभी दानदाताओं और स्वयंसेवकों का भी धन्यवाद किया जिनकी वजह से यह सेवा कार्य संभव हो पाया।
सेवा कार्य का संदेश:
यह कार्यक्रम एक बार फिर साबित करता है कि छोटी-छोटी पहल भी समाज में बड़े बदलाव ला सकती है। “नर सेवा ही नारायण सेवा है” – इस भावना के साथ नारायण सेवा समिति सतबरवा ट्रस्ट लगातार मानव कल्याण के कार्यों में जुटा हुआ है।
ऐसी नेक पहल को देखकर स्थानीय प्रशासन और अन्य सामाजिक संगठनों को भी प्रेरणा मिलनी चाहिए ताकि क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक विकास और राहत की पहुंच हो सके।


