सदियों पुराने वासुदेव कोना शिव मंदिर में सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब, हर-हर महादेव से गूंजता परिसर
सदियों पुराना वासुदेव कोना शिव मंदिर, सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
गुमला। रायडीह प्रखंड के वासुदेव कोना स्थित पौराणिक शिव मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के पवित्र महीने में मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का दर्शन, पूजन और जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर के पुजारी राजू भगत के अनुसार, यह शिव मंदिर सदियों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने वासुदेव कोना में स्थित शिवलिंग और मंदिर का निर्माण एक ही रात में किया था। इसी धार्मिक मान्यता के कारण मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान शिव की आराधना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सावन की सोमवारी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
सावन की तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी के अवसर पर भी रायडीह क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से देर शाम तक मंदिरों में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। हर ओर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। वासुदेव कोना शिव मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वासुदेव कोना का यह प्राचीन शिवालय केवल पूजा-अर्चना का स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर भी है।


