“रथयात्रा पर विकास भारती का हरित संकल्प, पौधरोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश”
रथयात्रा पर विकास भारती बिशुनपुर का हरित संकल्प: पौधरोपण अभियान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
‘एक पेड़–एक जीवन’ अभियान के तहत बच्चों, किसानों और महिला समूहों ने किया वृक्षारोपण, जलवायु संरक्षण का लिया संकल्प
गुमला। रथयात्रा के पावन अवसर पर विकास भारती बिशुनपुर परिसर में “एक पेड़–एक जीवन” अभियान के तहत व्यापक पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, विभिन्न गांवों से आए किसानों, महिला समूहों तथा विकास भारती के कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महेंद्र भगत ने कहा कि बढ़ता वैश्विक तापमान, अनियमित वर्षा, भूमि क्षरण और जैव विविधता में लगातार हो रही कमी आज पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए पौधरोपण सबसे प्रभावी, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो हरित आवरण बढ़ेगा, कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव कम होगा, भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों और किसानों से पौधरोपण को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व और जनआंदोलन के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फलदार, छायादार और स्थानीय प्रजातियों के पौधे न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि ग्रामीण आजीविका, पोषण सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूत बनाते हैं।
इस अवसर पर योगेश राय, कौशल किशोर, संत्री भगत, दयाली खेरवार एवं कुमकुम मैत्रा सहित विकास भारती के कार्यकर्ताओं ने पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन, संरक्षण और नियमित देखभाल के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। विद्यालय के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली, जबकि किसानों ने अपने खेतों और गांवों में अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का सामूहिक रोपण किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने यह संदेश दिया कि “वृक्ष केवल प्रकृति की धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और जलवायु-अनुकूल भविष्य की मजबूत आधारशिला हैं।”


