राष्ट्र की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं : बृजेश शुक्ला

राष्ट्र की सेवा से बडा़ कोई धर्म नहीं : बृजेश शुक्ला

एसबीआई फाउंडेशन द्वारा “एसबीआई ग्राम सेवा” के तहत “बिरसा मुंडा यूथ ट्रेनिंग सेंटर”, चुकरु, मेदिनीनगर में बच्चों को शारीरिक एवं मानसिक प्रशिक्षण से देश की सेवा में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। वर्दी सबों के नसीब में नहीं होती। जो प्रशिक्षण में पसीना बहाता है वही वर्दी पाता है। साथ ही किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना है जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। बच्चों में राष्ट्र की सेवा के प्रति भावना जागृत किया। राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। अपने निजी हित से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के बारे में सोचना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। राष्ट्रभक्ति का अर्थ केवल भावनात्मक होना नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का निर्वहन करना है। कानून का सम्मान, सामाजिक अनुशासन एवं राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा। यही है सच्ची राष्ट्रभक्ति की पहचान। स्वतंत्रता का मूल्य, जिन लोगों ने स्वतंत्र भारत की नींव रखी, उन्होंने यह आज़ादी केवल अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में हमें सौंपी है। आज की पीढ़ी का दायित्व है इस आज़ादी को बचाये रखने की। राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका अहम है। राष्ट्र का निर्माण केवल सरकार का ही दायित्व नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। अपने कर्म, अपने आचरण एवं अपने निर्णयों से। जब नागरिक ईमानदार होते हैं, तब राष्ट्र मजबूत होता है। आज देश को बाहरी शत्रुओं से अधिक आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार, असहिष्णुता एवं जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति। इनसे लड़ना ही आज की सबसे बड़ी राष्ट्र सेवा है। एकता और सहिष्णुता आपस में बनाए रखने की जरूरत है। विचार अलग हो सकते हैं, पर राष्ट्र के प्रति निष्ठा एक होनी चाहिए। अनुशासन, परिश्रम एवं संवैधानिक मूल्यों से ही राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित रहेगा। सच्ची राष्ट्रभक्ति शोर नहीं करती, वह कार्य करती है। वह सत्ता से नहीं, संविधान और विवेक से जुड़ी होती है। मोके पर पूर्व सैनिक बृजेश कुमार शुक्ला, पूर्व सैनिक विकास तिवारी (प्रशिक्षक), श्रीमती संजु शुक्ला, पूर्व सैनिक पंकज कुमार तिवारी (प्रशिक्षक), खुशदिल शुक्ला, परिधी राज, श्रेया सहित कई सारे बच्चे उपस्थित थे।