पद्मश्री रामदयाल मुंडा की जयंती पर बेरोजगार संघर्ष मोर्चा ने दी श्रद्धांजलि
बेरोजगार संघर्ष मोर्चा के तत्वाधान में पद्म श्री रामदयाल मुंडा की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कि सर्वप्रथम रामदयाल मुंडा के तस्वीर पर फूल माला चढ़ा कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कहा कि साहित्य संस्कृति के मनीषी थे। रामदयाल मुंडा उनका जन्म 23 अगस्त 1939 ई वीं रांची तमाड़ के दिवड़ी गाँव में हुआ है। रामदयाल मुंडा महान शिक्षा विद झारखंड आंदोलन कारी संस्कृति कर्मी लेखक विचारक के साथ ही साथ हर भूमिक में सर्वश्रेष्ठ थे। झारखंड आंदोलन के बौद्धिक दिशा देने में उनकी अहम भूमिका रही हैं। रामदयाल मुंडा 14 नवम्बर 1985 से 25 जनवरी 1987 तक रांची विश्वविद्यालय रांची के प्रति कुलपति थे। इसके बाद 27 जनवरी 1987 से 10 अगस्त 1988 तक कुलपति बने इसका कार्यकाल काफी संतोष जनक रहा है। श्री मुंडा को झारखंड रत्न सम्मान 2008 संगीत नाटक अकादमी समान 2008 पद्म श्री सम्मान 2010 में मिला था। बासुरी एवं मंदार बजाने में निपुण थे। वे किसी का निंदा करते थे। नहीं किसी का निंदा सुनते थे। मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी को चलना ही नृत्य है। और बोलना ही गीत है। शरीर ही मंदार है इसको चरितार्थ किया था। शिवनारायण साव ने रामदयाल मुंडा के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा की वे झारखंड के सर्व मान्य नेता होने का गौरव प्राप्त है। वे हमेशा सच्चाई के रास्तें पर चल कर झारखंड आंदोलन को गति दिया था । इस अवसर पर नीरज कुमार, सुरज कुमार, करुणा सागर, कृष्णा राम, जयपाल मोची, संजय मिस्त्री, ने अपने अपने विचार व्यक्त किया। रामनरेश महतो ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

