पालकोट में किशोरी मोहन लाल सरस्वती शिशु विद्या मंदिर कैम्बा मे ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम आयोजित, नारी सशक्तिकरण और सांस्कृतिक मूल्यों को नया आयाम

पालकोट (गुमला)। महिलाओं को आत्मनिर्भर, सक्षम और नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे लाने के उद्देश्य से पालकोट में ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नारी सशक्तिकरण पर आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, नेतृत्व कौशल विकसित करना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करते हुए समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
नारी के सप्तगुणों पर आधारित कार्यक्रम
सप्तशक्ति संगम’ का आधार श्रीमद्भागवत गीता के दशम अध्याय के 34वें श्लोक में वर्णित नारी के सात दिव्य गुणों पर आधारित है—
कीर्ति, श्री (समृद्धि), वाणी, स्मृति, मेधा (बुद्धि), धृति (धैर्य) और क्षमा।
कार्यक्रम का उद्देश्य इन गुणों को पहचानकर महिलाओं के अंदर छिपी क्षमताओं को सामने लाना तथा उन्हें समाज एवं परिवार में मजबूत भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।
महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व विकास पर विशेष फोकस
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, ऐसे में आवश्यक है कि समाज उन्हें और अधिक अवसर प्रदान करे। ‘सप्तशक्ति संगम’ जैसे आयोजन महिलाओं को न केवल ज्ञान देता है, बल्कि उन्हें अपनी आंतरिक शक्तियों को समझने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मंच भी प्रदान करता है।
भारतीय संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति में नारी की महत्ता और सात दिव्य शक्तियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि भारतीय परंपरा में महिला को शक्ति का स्वरूप माना गया है। इसलिए इस कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक जीवन में महिलाओं को मजबूत बनाते हुए सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवंत रखना है।
समाज में परिवर्तन की दिशा में सशक्त कदम
सामुदायिक स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ सहभागी बनीं। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जब महिलाएँ जागरूक, आत्मनिर्भर और नेतृत्वकारी भूमिका में आती हैं, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन अनिवार्य रूप से होता है।