नवोदित रचनाकारों की प्रतिभा का संगम बना “काव्यानुरागी” का 15वाँ आयोजन

नवोदित रचनाकारों की प्रतिभा का संगम बना “काव्यानुरागी” का 15वाँ आयोजन

साहित्य, संगीत और संवेदनाओं से सराबोर हुई काव्य संध्या

       नवोदित रचनाकारों को समर्पित नियमित मासिक साहित्यिक आयोजन “काव्यानुरागी” का 15वाँ आयोजन रविवार को बंधन मैरिज हॉल, नवादा मोड़, गढ़वा में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कला, साहित्य और संस्कृति की त्रिवेणी से ओत-प्रोत इस आयोजन में जिले के अनेक कवि, साहित्यकार, शिक्षक, कलाकार एवं साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि गढ़वा की साहित्यिक चेतना निरंतर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है तथा नवोदित प्रतिभाओं को उचित मंच प्रदान करने में “काव्यानुरागी” की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुकी है।
       कार्यक्रम का शुभारंभ कला के सर्जक भगवान नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की। पूरा वातावरण साहित्यिक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा से सराबोर दिखाई दिया।
        कार्यक्रम का परिचय देते हुए साहित्यकार प्रमोद कुमार ने कहा कि “काव्यानुरागी” विगत दो वर्षों से गढ़वा जिले में निरंतर संचालित होने वाला ऐसा मंच है, जहाँ नवोदित रचनाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिष्ठित कवि भी आभासी माध्यम से इस मंच से जुड़ते रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मंच से जुड़े कई रचनाकार राष्ट्रीय स्तर के मंचों तक पहुँचकर गढ़वा जिले एवं झारखंड का मान बढ़ा चुके हैं। उन्होंने पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच को साहित्य की नई पौध को तराशने वाला सशक्त मंच बताया।
      कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना “या कुंदेन्दु तुषार हार धवला...” से हुई, जिसकी मधुर प्रस्तुति डॉक्टर टी. पीयूष ने दी। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
        कवि श्रवण शुक्ल ने “चंदन है इस देश की माटी...” प्रस्तुत कर श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर दी।
         शिक्षक कवि धर्मेंद्र कुमार पुष्कर ने अपनी व्यंग्य रचना के माध्यम से वर्तमान समाज में मरती हुई मानवीय संवेदनाओं पर प्रभावशाली प्रहार किया। उनकी प्रस्तुति ने लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। 
       डॉक्टर टी. पीयूष ने युवाओं को प्रेरित करने वाली कविता

“ऊँचाइयाँ कौन नहीं चाहता,
कौन नहीं सोचता, मैं पहुँच सकूँ वहाँ,
बहुत कम लोग चढ़ सके हो जहाँ…”
की प्रस्तुति देकर युवाओं के भीतर आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना जगाई। उनकी ओजपूर्ण प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।
कवि गंगेश पांडेय ने “किसान बेचारा खेत में सोच रहा, यह मौसम की कैसी लाचारी है…” कविता के माध्यम से किसानों की पीड़ा और संघर्ष को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।
अधिवक्ता जयपूर्णा विश्वकर्मा ने “हर इंसान का वक्त बदलता है…” कविता सुनाकर जीवन में सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश दिया।
साहित्यकार प्रमोद कुमार ने अपनी रचना
“इस तरह प्यार के रिश्ते दोनों यहाँ,
ज़िन्दगी भर बखूबी निभाते रहे…”
के माध्यम से दांपत्य जीवन के सकारात्मक और संवेदनशील पक्ष को उजागर किया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम में कवि जय प्रकाश विश्वकर्मा, कवि नीरज कुमार, कवि सौरभ कुमार तिवारी तथा कलाकार दीपक शुक्ल ने भी अपनी रचनाओं और प्रस्तुतियों से समां बाँध दिया। सभी रचनाकारों ने समाज, प्रेम, संघर्ष और मानवीय मूल्यों को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी।
वरिष्ठ पत्रकार विवेकानंद उपाध्याय ने कहा कि प्रत्येक माह आयोजित होने वाला “काव्यानुरागी” वर्तमान समय में गढ़वा जिले की रचनाधर्मिता को पल्लवित एवं पुष्पित करने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य और संस्कृति को जीवित रखने के साथ समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने किया।
आयोजन को सफल बनाने में संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के संरक्षक विजय सोनी, प्रमोद कुमार, सौरभ कुमार तिवारी, नीरज कुमार सहित अनेक साहित्यप्रेमियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
“वन्दे मातरम्…” के सामूहिक गान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।