नन्हे कदम, ऊँची उड़ान: गुमला में दो दिवसीय शिशु वाटिका कार्यशाला का शुभारंभ
नन्हे कदम, ऊँची उड़ान: गुमला में दो दिवसीय शिशु वाटिका कार्यशाला का शुभारंभ
गुमला। बालकों के सर्वांगीण विकास और संस्कारयुक्त शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, गुमला में दो दिवसीय संकुल स्तरीय शिशु वाटिका कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में गुमला संकुल के विभिन्न विद्यालयों—भरनो, कैम्बा टेंगेरिया, आदर, मुर्गो और सिसई—की वाटिका दीदियाँ उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामकिशोर रजक, सचिव विजय बहादुर सिंह, पूर्व विभाग शिशु वाटिका प्रमुख पूनम सारंगी, प्राचार्य जितेन्द्र तिवारी एवं कार्यक्रम प्रमुख अर्चना मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
प्राचार्य जितेन्द्र तिवारी ने प्रस्तावना रखते हुए कहा कि शिशु वाटिका का मूल आधार बच्चों में पंचकोष—शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक—विकास को संतुलित रूप से विकसित करना है। उन्होंने कहा, “यदि इन आयामों से जुड़े 12 क्रियाकलापों को सही ढंग से लागू किया जाए, तो एक श्रेष्ठ और आदर्श नागरिक की नींव रखी जा सकती है।”
विशेषज्ञ पूनम सारंगी ने शिशु वाटिका की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं की बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षिकाएँ बच्चों को माँ और दादी जैसा स्नेह देकर शिक्षा दें, ताकि सीखना उनके लिए स्वाभाविक और आनंददायक बने।
विद्यालय के सचिव विजय बहादुर सिंह ने प्रेरक उद्बोधन में कहा की शिशु कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, उन्हें जैसा रूप दिया जाए वे वैसे ही बनते हैं। शिशु वाटिका केवल पाठशाला नहीं, बल्कि संस्कारशाला है, जहाँ खेल-खेल में व्यक्तित्व का निर्माण होता है। शिक्षिका का स्नेह ही बच्चे के भीतर छिपी प्रतिभा का द्वार खोलता है।”
दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रशिक्षण के साथ कई रचनात्मक गतिविधियाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगी—नन्हे शिशुओं की कलाकृतियों की प्रदर्शनी, रंगमंच एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, तथा शारीरिक-मानसिक स्फूर्ति के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए खेलों का अभ्यास।
इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा पद्धतियों के समन्वय का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सके।



