मॉडर्न पब्लिक स्कूल बना विश्व रक्तदान दिवस पर प्रेरणा की एक अनूठा मिसाल

अंगदान और रक्तदान: जीवन का सर्वश्रेष्ठ उपहार

विशेष आलेख: मॉडर्न पब्लिक स्कूल बना विश्व रक्तदान दिवस पर प्रेरणा की एक अनूठा मिसाल

“रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं, क्योंकि यह किसी के बुझते हुए जीवन के दीपक को फिर से रोशन कर सकता है। जब तक जीवित रहें, रगों में बहते लहू से जिंदगियां बचाएं, और जब विदा लें, तो अपने अंगों से किसी की दुनिया को रोशन कर जाएं।”

कोडरमा। हर साल ‘विश्व रक्तदान दिवस’ हमें याद दिलाता है कि हमारा थोड़ा सा रक्त किसी परिवार की खुशियां वापस लौटा सकता है। आज के इस दौर में जहां लोग अपनी व्यस्त जिंदगी से वक्त नहीं निकाल पाते, वहीं मॉडर्न पब्लिक स्कूल, कोडरमा के प्राचार्य गुरु चरण वर्मा ने मानवता की एक ऐसी बेमिसाल कहानी लिखी है, जो हर नागरिक के लिए प्रेरणापुंज है। श्री वर्मा अब तक 48 से अधिक बार रक्तदान कर समाज के सामने एक महान मिसाल पेश कर चुके हैं।

पिता की सीख से मिला सेवा का संकल्प
गुरु चरण वर्मा के इस सेवा भाव की जड़ें उनके परिवार से जुड़ी हैं। उन्हें नियमित रक्तदान करने की प्रेरणा अपने पूज्य पिता जी से मिली, जो साल 2007 में इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। पिता की स्मृति और उनकी सीख को सीने से लगाए श्री वर्मा पिछले कई वर्षों से हर 3 महीने में स्वेच्छा से रक्तदान करते आ रहे हैं, ताकि रक्त की कमी के कारण किसी भी बेबस इंसान की जान न जाए।

कोरोना काल के ‘संकटमोचक’
जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के खौफ से घरों में कैद थी, तब प्राचार्य गुरु चरण वर्मा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मानवता की सेवा कर रहे थे। उस कठिन समय में उन्होंने न केवल अनगिनत रक्तदान शिविर लगाए, बल्कि जरूरतमंदों को रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स मुहैया कराने में दिन-रात एक कर दिया। संकट के उस दौर में उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाइयां और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सुविधाएं भी लोगों तक पहुंचाईं।

डिजिटल तकनीक और देशव्यापी नेटवर्क का अनूठा संगम
वर्मा का सेवा भाव केवल कोडरमा या झारखंड तक सीमित नहीं है। वे अब तक 50 से अधिक रक्तदान शिविर आयोजित कर चुके हैं। तकनीक का सकारात्मक उपयोग करते हुए उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों के ब्लड ग्रुप्स का एक मजबूत व्हाट्सएप नेटवर्क तैयार किया है। इस डिजिटल ग्रुप के जरिए देश के किसी भी कोने में बैठे मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जाता है।

दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप की उपलब्धता: चिकित्सा जगत में ‘बॉम्बे ब्लड ग्रुप’ को बेहद दुर्लभ माना जाता है। वर्मा ने दक्षिण भारत (साउथ) के रक्त समूहों और डोनर्स से संपर्क साधकर इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप को भी मरीजों तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है।

एक यूनिट रक्त, तीन जिंदगियां!
जागरूकता फैलाते हुए वर्मा कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति एक यूनिट रक्तदान करता है, तो उससे अलग-अलग घटकों (कंपोनेंट्स) को निकालकर 3 लोगों की जान बचाई जा सकती है। रक्तदान से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम है।

जीवित रहते रक्तदान, मरणोपरांत अंगदान
रक्तदान के साथ-साथ प्राचार्य वर्मा ने समाज को ‘अंगदान’ जैसी महान मुहिम से भी जोड़ा है। उन्होंने ऑर्गन डोनेशन कैंप लगाकर लोगों को मरणोपरांत देह और अंग दान करने के लिए प्रेरित किया। इसी कड़ी में, 09 जून 2026 को ‘विश्व नेत्रदान दिवस’ के अवसर पर श्री वर्मा ने स्वयं अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया और विद्यालय के शिक्षकों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय की निर्देशिका संगीता शर्मा भी इस महायज्ञ में पीछे नहीं रहीं, उन्होंने भी अपनी आंखें दान कर समाज के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

संगीता शर्मा का संदेश:
“जब तक हम इस सुंदर सृष्टि में जीवित हैं, हमें नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए। और जब हमारी सांसें थम जाएं, तो मरणोपरांत अपने अंगों को दान कर देना चाहिए। यह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ और सबसे पवित्र दान है, जो हमें मरने के बाद भी दूसरों की आंखों और धड़कनों में जिंदा रखता है।”

मॉडर्न पब्लिक स्कूल के इस अनूठे प्रयास और प्राचार्य गुरु चरण वर्मा के इस सेवा पथ को पूरा कोडरमा और देश सलाम करता है। आइए, इस विश्व रक्तदान दिवस पर हम भी संकल्प लें कि हम रक्त और अंग दान के इस महाभियान का हिस्सा बनेंगे।