गुरुजनों के संस्कारों ने बनाया SBI अधिकारी, अपने ही विद्यालय पहुंचकर भावुक हुईं दीपाली शर्मा
गुरुजनों के संस्कारों ने बनाया SBI अधिकारी, अपने ही विद्यालय पहुंचकर भावुक हुईं दीपाली शर्मा
गिरिडीह। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में शनिवार को आयोजित वंदना सभा उस समय भावुक और प्रेरणादायक बन गई, जब विद्यालय की पूर्व छात्रा एवं वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक, गिरिडीह की अधिकारी दीपाली शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय पहुंचीं। वर्षों बाद अपने विद्यालय के प्रांगण में पहुंचकर उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की यादें साझा कीं और भैया-बहनों को सफलता का मंत्र दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि दीपाली शर्मा एवं आचार्या सुजाता दीदी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं पुष्पार्चन कर किया। इसके बाद आचार्य डॉ. ब्रजेश बर्णवाल ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया। आचार्या सुजाता दीदी ने अंगवस्त्र प्रदान कर दीपाली शर्मा को सम्मानित किया।
अपने संबोधन में दीपाली शर्मा भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें उनके गुरुजनों के आशीर्वाद और विद्यालय से मिले संस्कारों की बड़ी भूमिका है। विद्यालय परिसर में लौटकर उन्हें अपने पुराने दिनों की याद आ गई। उन्होंने कहा कि गुरुजनों का लाड़-प्यार और उनकी डांट, दोनों ने ही उन्हें जीवन की सही राह दिखाने का काम किया।
उन्होंने विद्यालय के भैया-बहनों से मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासन का पालन करने और संस्कारवान बनने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।
वरिष्ठ आचार्य राजीव सिन्हा ने दीपाली शर्मा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब विद्यालय की छात्रा अधिकारी बनकर अपने ही विद्यालय में लौटती है, तो यह पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व और सबसे बड़ा पुरस्कार है। उन्होंने भैया-बहनों से दीपाली शर्मा की सफलता से प्रेरणा लेने की अपील की।
प्रधानाचार्य आनंद कमल ने कहा कि दीपाली शर्मा जैसी पूर्व छात्राएं विद्यालय की सच्ची धरोहर हैं। उनकी सफलता वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह बताती है कि अनुशासन, संस्कार और निरंतर परिश्रम के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी आचार्य-दीदी एवं बड़ी संख्या में भैया-बहन उपस्थित रहे। पूर्व छात्रा की सफलता और उनके भावुक संबोधन ने पूरे विद्यालय परिवार को गौरवान्वित और विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

