गिरिडीह कॉलेज में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का चौथा दिन, शिक्षा में AI और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन

गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला का आज चौथा दिन था। यह कार्यशाला विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग तथा आईयूसीटीई, बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित है। चार सत्रों में आयोजित आज के कार्यक्रम में दो विषय विशेषज्ञ थे। प्रथम एवं द्वितीय सत्र की विषय विशेषज्ञ थीं एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ में एसोसिएट प्रोफेसर एवं बी.एड. कार्यक्रम की प्रमुख डॉ. रितु चक्रवर्ती, जिन्हें शिक्षक शिक्षा, शैक्षिक नेतृत्व तथा नीति क्रियान्वयन के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। तृतीय सत्र के विषय विशेषज्ञ थे आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी के सहायक प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शैक्षिक प्रौद्योगिकी तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर अपने शोध कार्यों के लिए जाने जाते हैं। चतुर्थ सत्र सेमिनार का था।
डॉ. रितु चक्रवर्ती ने भारतीय ज्ञान परंपरा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मूल्यांकन प्रणाली के अंतर्संबंध पर अत्यंत ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन की पारंपरिक अवधारणाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर अधिक समावेशी तथा न्यायपूर्ण बनाया जा सकता है। प्रथम एवं द्वितीय सत्र में उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मूल्यांकन केवल परीक्षा और अंक प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के समग्र विकास, रचनात्मकता, नैतिकता तथा व्यावहारिक दक्षताओं को समझने और प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि एआई आधारित उपकरण मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा छात्र-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सत्र समापन पर डॉ. मिथलेश कुमार महथा ने विषय विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके व्याख्यानों ने प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, समतामूलक मूल्यांकन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शैक्षिक उपयोग के संबंध में नई दृष्टि प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक विमर्श उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
तृतीय सत्र में डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने शिक्षा में एआई एनालिटिक्स के बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि डेटा आधारित विश्लेषण के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की प्रवृत्तियों, उपलब्धियों तथा चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार तथा संस्थागत निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। सत्र समाप्ति पर डॉ अजीत सिंह, के एन बख्शी कॉलेज, गिरिडीह के प्राचार्य ने आभार ज्ञापन किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बलभद्र ने किया तथा प्राचार्य डॉ. मृगेन्द्र नारायण सिंह ने विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ प्रतिभाग कर रहे गिरिडीह जिला के विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों, गिरिडीह कॉलेज के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में लंगटा बाबा कॉलेज, मिर्जागंज, आदर्श कॉलेज, राजधनवार, के. एन. बख्शी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, स्कॉलर बी.एड. कॉलेज, सुभाष टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, पारसनाथ कॉलेज, ईसरी बाजार तथा गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह के अनेक शिक्षक सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं।