गढ़वा में रामकथा: विनोद पाठक बोले— संस्कार परंपरा से ही समाज को नैतिक पतन से बचाया जा सकता है

समाज को पतन से बचाने के लिये संस्कार परंपरा को स्थापित करने की जरूरत : विनोद पाठक

शारदीय नवरात्रि पर गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में रामकथा का आयोजन

गढ़वा : सनातन संस्कृति में संस्कार परंपरा प्राचीन युग से चली आ रही है. हमारे ऋषियों द्वारा बनायी गयी संस्कार परंपरा पूरी तरह से वैज्ञानिक है. इससे मनुष्य का शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों तरह का विकास होता है. साथ ही उसमें सही रूप से मानवता का विकास हो पाता है. संस्कार के प्रभाव से बच्चा तेजस्वी, ओजस्वी और साहसी बन पाता है. यह बात गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने कही. वे मंगलवार की शाम शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में आयोजित रामकथा में बोल रहे थे. श्री पाठक ने कहा कि भगवान राम अवतारी पुरूष थे, इसके बाद भी उनको जन्म के बाद सभी संस्कार कराया गया. राजा दशरथ ने अपने गुरू वशिष्ठ से श्रीराम सहित भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण चारो भाइयों का समय पर नामकरण से लेकर चूड़ामणि, यज्ञोपवित, विद्यारंभ आदि सभी संस्कार कराये. उन्होंने कहा कि आज संस्कार परंपरा छोड़ देने के कारण मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद भी व्यक्ति में मानवता का अभाव दिखता है. समाज में नैतिक पतन बढ़ता जा रहा है. चारो ओर अनीति, अत्याचार और व्याभिचार का बोलबाला दिख रहा है. उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान में हमने काफी प्रगति की है, लेकिन संस्कार के अभाव में सभी में भोगवादी प्रवृति बढ़ गयी है. रिश्ते तार-तार हो रहे हैं. हर दिन ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं, जिनकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी. कम उम्र के बच्चे ऐसा कृत्य कर रहे हैं कि शर्म से सिर झुक जा रहा है. श्री पाठक ने कहा कि सरकार ऐसे अपराधों को रोकने के लिये कितना भी कठोर कानून क्यों न बना दे, लेकिन सिर्फ कानून से वर्तमान परिस्थिति में बदलाव लाना संभव नहीं है. यदि इस परिस्थिति में वास्तविक परिवर्तन चाहते हैं, तो हमें अपनी प्राचीन संस्कार परंपरा में वापस होना होगा. तभी समाज को पतन से बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में 16 संस्कार बताये गये हैं. संस्कार उसी समय से शुरू हो जाता है, जब शिशु मां के गर्भ में रहता है. प्रचवन में पुंसवन संस्कार से लेकर नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवित, विवाह आदि सभी संस्कार को बताते हुये इसके वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व की व्याख्या की गयी. इस अवसर पर व्यास शिवपूजन मेहता द्वारा संस्कार पर आधारित कई गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को काफी प्रभावित किया. इसके पूर्व तीसरे दिन के प्रवचन का उद्घाटन स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सहायक धीरज पाठक और उनकी पत्नी निवेदिता पाठक ने अखंड दीप जलाकर और देवपूजन कर किया. गायत्री परिवार के सरयू चंद्रवंशी, ट्रस्टी मिथिलेश कुशवाहा, प्रभु दयाल प्रजापति, ओम समिति के अध्यक्ष चंद्रमणि कुमार, अजीत शर्मा, गौतम विश्वकर्मा, अनुराग कुमार आदि ने उनका स्वागत किया. संगीत में रंजीत विश्वकर्मा, नंदू ठाकुर, अशोक विश्वकर्मा और अभिषेक ठाकुर ने संगत किया.

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