बेरोजगार संघर्ष मोर्चा ने मनाई बाबू जगजीवन राम की पुण्यतिथि, भारत रत्न की मांग तेज

बेरोजगार संघर्ष मोर्चा के जिला कार्यालय में स्वतंत्रता सेनानी पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की 40 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कि संचालन संजय कुमार ने किया। सर्वप्रथम जगजीवन राम के तस्वीर पर फूल माला चढ़ा कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कहा की जगजीवन राम सामाजिक बदलाव के प्रतीक थे। सामाजिक असमानता का दमश दलितों के लिए आवाज उठाने की ठानी 19 अक्टूबर 1935 को पहली बार दलितों के लिए मतदान के अधिकार की मांग की आरक्षण दिलाने एवम् लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई छूआ छूत मिटाने के लिए 1955 में कानून बनवाया देश के सभी मंदिरों के द्वार खुलवाया ताकि दलित समाज भी मंदिरों में पुजा पाठ कर सके। जगजीवन राम ने 1952 से 1986 तक लगातार संसद चुने गए। एवम 20 वर्षो तक केंद्रीय मंत्री रहे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कई बार जेल गए। उन्होंने दलितों के हक अधिकार के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष किया हरित क्रांति श्रम सुधारों व सामाजिक न्याय के क्षेत्र में काफ़ी योगदान दिया जगजीवन राम सामाजिक न्याय एवम श्रम सुधारों के अगुआ थे। जगजीवन राम को अब तक भारत रत्न नहीं मिलना काफी दुखद एवम चिंतनीय हैं जब कि जगजीवन राम भारत रत्न के असली हकदार हैं संजय कुमार ने जगजीवन राम के जीवनी पर प्रकाश डाला एवम् कहा कि जगजीवन राम का निधन 6 जुलाई 1986 ई को हुआ था। ये दलितों के महिषा थे एवम श्रम कानून के अगुआ थे। इस अवसर पर नीरज कुमार, कृष कुमार, रोहित पासवान, सुधीर कुमार,भरत राम, आर्यन कुमार, कृष्णा राम, जयपाल मोची, सतीश दुबे, संतोष विश्वकर्मा, शिवनारायण साव, ने अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए। जगजीवन राम को भारत रत्न देने की मांग भारत सरकार से की है। रामनरेश महतो ने धन्यवाद ज्ञापित किया।