अबुआ राज मे गरीबों के लिए सरकारी वहीं मंत्रियों/नौकरशाहों के लिए निजी स्कूल व अस्पताल क्यों?: झारखण्ड क्रांति मंच

अबुआ राज मे गरीबों के लिए सरकारी वहीं मंत्रियों/नौकरशाहों के लिए निजी स्कूल व अस्पताल क्यों?: झारखण्ड क्रांति मंच

झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष सह झारखण्ड आन्दोलन कारी रह चुके शत्रुघ्न कुमार शत्रु ने मेदिनीनगर में प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखण्ड आन्दोलन के महानायकों व आन्दोलन कारियों के सपनों पर पानी फेरने वाले कथित अबुआ राज का ढिंढोरा पीटने वाले हेमन्त सरकार को यह बताना चाहिए कि इस राज्य में आम नागरिकों व गरीबों के लिए घटिया सरकारी अस्पताल व स्कूल वहीं मंत्रियों/नौकरशाहों समेत खास लोगों के लिए खास निजी अस्पताल व स्कूल की व्यवस्था क्यों है?
बयान में उन्होंने कहा है कि झारखण्ड आन्दोलनकारी के कोख से उत्पन्न मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन जी को यह बताना चाहिए कि आपूर्ति विभाग के ज०वि०प्र० से वितरित किए जाने वाले थर्ड ग्रेड के धोती/साड़ी/लुंगी को पहनकर मुख्यमंत्री/मंत्री/विधायक व नौकरशाह क्या अपना फोटो मीडिया में जारी कर सकते हैं? कल्याण विभाग द्वारा वितरित साइकल का प्रयोग क्या इनके बेटा/बेटी कर सकते हैं?
क्या झारखण्ड आन्दोलन कारियों व गरीब झारखण्डी लोगों के बीच थर्ड ग्रेड के धोती/साड़ी/लुंगी/साइकल आदि का कमिशन इनके द्वारा खाने के लिए ही अलग राज्य का गठन हुआ था?
बयान में जेकेएम अध्यक्ष ने कहा है कि आखिर क्यों प्रचुर खनिज सम्पदा से भरपूर 26 वर्षों के इस झारखण्ड राज्य में एक भी ऐसा सरकारी अस्पताल नहीं बन पाया, जहां बिमार पड़ने पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री,मंत्री, विधायक व नौकरशाह वहां इलाज करा सकें?
बयान के अंत में उन्होंने कहा है कि इस देश में क्रोनी व कारपोरेट कैपिटलिज्म की कोख से उत्पन्न नरेंद्र मोदी की राह पर झारखण्ड आन्दोलनकारी की कोख से उत्पन्न हेमन्त सरकार को to निजीकरण के रास्ते का अंधानुकरण नहीं कर अलग राज्य के सपने को साकार करना चाहिए था, लेकिन कारपोरेट के भंवर जाल में फंसे हेमन्त सरकार को भाजपा व मोदी के सपनों का झारखण्ड बनाने से पहले झारखण्ड आन्दोलन के इतिहास पर दृष्टिपात कर लेना चाहिए।