धनतेरस आज, मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की होगी पूजा, सोना-चांदी और बर्तन खरीदना माना जाता है शुभ
दीपावली के पावन पर्व की शुरुआत आज धनतेरस या धनत्रयोदशी से हो रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है और इस बार यह शुक्रवार, 6 नवंबर को पड़ा है। इस दिन घरों में माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा की जाएगी।
धनतेरस को धन्वंतरि त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु के अंश भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को स्वास्थ्य, आयु और अमृतत्व की कामना से जोड़ा जाता है।
शास्त्रीय मान्यताओं में धनतेरस केवल धन-संपत्ति का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य और सुख-शांति का भी पर्व माना गया है। इस अवसर पर भक्त धन्वंतरि की पूजा कर स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।
इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। एक लोककथा के अनुसार, माता लक्ष्मी ने एक किसान को बताया था कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की रात घी का दीपक जलाकर, कलश में सिक्के भरकर उनका पूजन करे। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में पूरे वर्ष धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है।
धनतेरस की संध्या में यम दीपक जलाने की परंपरा भी है। भक्त अपने पूर्वजों की स्मृति में दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाते हैं और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना करते हैं।
धनतेरस खरीदारी के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन लोग सोना-चांदी, गहने, बर्तन, वाहन और घर के लिए आवश्यक नई वस्तुएं खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में खरीदी गई चीजों से घर में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
विशेष रूप से बर्तन खरीदने की परंपरा भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश से जोड़ी जाती है। मान्यता है कि इससे घर में धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है। झाड़ू को घर की स्वच्छता और माता लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है। दीपावली से पहले लोग घर की सफाई कर मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी करते हैं।
कुछ परंपराओं में विषम संख्या में झाड़ू खरीदने का विधान बताया जाता है, जैसे तीन, पांच या सात झाड़ू। हालांकि, लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार झाड़ू खरीदते हैं।
धनतेरस के साथ दीपावली का उत्सव और गहरा होगा। घर-घर में दीप, पूजा, खरीदारी और परिवार के मिलन का माहौल बना हुआ है, जबकि बाजारों में भी त्योहारी खरीदारी का उत्साह देखा जा रहा है।

