कांडी में श्रद्धा और उल्लास से मनी विश्वकर्मा पूजा, मशीनों-औजारों की हुई विधिवत आराधना

कांडी प्रखंड में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनी विश्वकर्मा पूजा

देवशिल्पी की पूजा में सजे गैराज और वर्कशॉप, मशीनों-औजारों की हुई विधिवत आराधना; कारीगरों व व्यवसायियों ने सुख-समृद्धि की मांगी दुआ

कांडी/गढ़वा। देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा गुरुवार को कांडी प्रखंड क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। प्रखंड मुख्यालय कांडी सहित भीलमा, सेमौरा, सुंडीपुर, खरौंधा, लमारी कला समेत विभिन्न गांवों और बाजार क्षेत्रों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर सुबह से ही उत्सवी माहौल रहा। वाहन गैराज, मोटर वर्कशॉप, मशीनरी प्रतिष्ठानों, निर्माण कार्य से जुड़े स्थानों और विभिन्न तकनीकी कार्यस्थलों पर विशेष सजावट की गई। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
सुबह होते ही पूजा स्थलों की साफ-सफाई और सजावट का सिलसिला शुरू हो गया था। गैराज संचालकों, मिस्त्रियों और कारीगरों ने अपने-अपने कार्यस्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया। कहीं रंग-बिरंगी झालरों से प्रतिष्ठान को सजाया गया तो कहीं पूजा पंडाल तैयार कर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके बाद पंडितों द्वारा विधिवत पूजा-पाठ कराया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा के समक्ष पुष्प, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपने कार्य, व्यवसाय और प्रतिष्ठान की उन्नति की कामना की।
मशीनों और औजारों की भी हुई पूजा
विश्वकर्मा पूजा का सबसे खास पहलू कार्य और तकनीकी साधनों के प्रति सम्मान रहा। विभिन्न स्थानों पर मशीनों, वाहनों, मोटर, जनरेटर, औजारों, उपकरणों तथा अन्य कार्य में उपयोग होने वाले सामानों को साफ कर उनकी पूजा की गई। गैराज में खड़े वाहनों और वर्कशॉप में रखे औजारों को भी पूजन सामग्री अर्पित की गई।
कारीगरों और मिस्त्रियों का मानना है कि जिन औजारों और मशीनों के माध्यम से वे अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, उनकी पूजा करना भगवान विश्वकर्मा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ श्रम और हुनर का सम्मान भी है। यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग के लिए अपने कर्म और कौशल के प्रति आस्था व्यक्त करने का पर्व भी बन गया है।
देवताओं के शिल्पकार माने जाते हैं भगवान विश्वकर्मा
हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी कहा जाता है। मान्यता है कि वे निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल के अधिष्ठाता देव हैं। विभिन्न धार्मिक कथाओं और परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को दिव्य निर्माण-कला में निपुण बताया गया है। इसी कारण कारीगर, शिल्पकार, लोहार, बढ़ई, मिस्त्री, इंजीनियर, मशीनरी से जुड़े लोग और निर्माण कार्य से जुड़े व्यवसायी उन्हें विशेष श्रद्धा से पूजते हैं।
विश्वकर्मा पूजा सामान्य तौर पर कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 17 सितंबर को पड़ा। पंचांग के अनुसार इसी दिन सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश हुआ, जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि की निर्माण-कला और शिल्प परंपरा से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि इस दिन मशीनों, औजारों, वाहनों और कार्यस्थलों की पूजा करने की परंपरा कई क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रचलित है।
कांडी में सुबह से बना रहा भक्तिमय माहौल
कांडी बाजार सहित प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में गुरुवार को सुबह से ही विश्वकर्मा पूजा को लेकर चहल-पहल रही। पूजा स्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे। कई स्थानों पर पूजा के बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया।
विशेष रूप से वाहन गैराज और वर्कशॉप में काम करने वाले मिस्त्री, वाहन चालक, तकनीकी कामगार तथा प्रतिष्ठान संचालक पूजा को लेकर काफी उत्साहित नजर आए। लोगों ने भगवान विश्वकर्मा से अपने कारोबार में तरक्की, मशीनों के सुचारु संचालन, कार्य में सफलता और परिवार में सुख-शांति की कामना की।
प्रखंड के भीलमा, कांडी, सेमौरा, सुंडीपुर, खरौंधा और लमारी समेत कई गांवों में पूजा आयोजन के कारण दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा। पूजा स्थलों पर स्थानीय लोगों की आवाजाही लगी रही। शाम तक कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
श्रम, हुनर और तकनीक के सम्मान का पर्व
विश्वकर्मा पूजा की विशेषता यह भी है कि इसमें केवल भगवान की प्रतिमा की पूजा नहीं होती, बल्कि काम के साधनों को भी सम्मान दिया जाता है। किसान अपने कृषि उपकरणों, वाहन चालक अपने वाहनों, मिस्त्री अपने औजारों और मशीनरी से जुड़े लोग अपनी मशीनों की पूजा करते हैं। इस तरह यह पर्व श्रम, हुनर, तकनीक और कर्म के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
कांडी जैसे ग्रामीण क्षेत्र में जहां बड़ी संख्या में लोग खेती, वाहन संचालन, मरम्मत कार्य, निर्माण कार्य, कारीगरी और छोटे-बड़े व्यवसायों से जुड़े हैं, वहां विश्वकर्मा पूजा का अपना विशेष महत्व है। गांव-कस्बों के गैराज से लेकर बाजार की वर्कशॉप तक इस दिन काम के उपकरणों को साफ-सुथरा कर उनकी पूजा करने की परंपरा देखने को मिली।
पूजा के दौरान लोगों ने भगवान विश्वकर्मा से अपने प्रतिष्ठान की उन्नति, व्यवसाय में वृद्धि, कार्य में सफलता तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। कई पूजा स्थलों पर प्रसाद वितरण भी किया गया।
कुल मिलाकर कांडी प्रखंड में विश्वकर्मा पूजा आस्था, परंपरा और कर्म के सम्मान के संगम के रूप में मनाई गई। भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बहाने कारीगरों, मिस्त्रियों, वाहन चालकों, व्यवसायियों और तकनीकी कार्य से जुड़े लोगों ने अपने श्रम और हुनर के प्रति सम्मान व्यक्त किया। दिनभर पूजा स्थलों पर बनी चहल-पहल और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से प्रखंड क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।