आजादी के दशकों बाद भी विकास से महरूम बेन्दवाकोना, मरीज को 2 किमी तक गेड़ुवा भार में ढोकर सड़क तक लाने की मजबूरी
आजादी के दशकों बाद भी विकास से महरूम बेन्दवाकोना, मरीज को 2 किमी तक गेड़ुवा भार में ढोकर सड़क तक लाने की मजबूरी
सड़क नहीं, तो एंबुलेंस भी नहीं पहुंचती गांव; बीमार पड़ने पर खाट और गेड़ुवा भार ही ग्रामीणों का सहारा, डिबरी की रोशनी और डाड़ी-चुआं के पानी से गुजर रही जिंदगी
गुमला। आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण इलाकों में विकास की तस्वीर कितनी अधूरी है, इसकी एक दर्दनाक तस्वीर गुमला जिले के रायडीह प्रखंड से सामने आई है। सुरसांग थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पोड़-कोब्जा के राजस्व ग्राम रमजा स्थित बेन्दवाकोना गांव आज भी सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
गांव तक सड़क नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीणों को बीमारी और आपात स्थिति में भुगतना पड़ता है। गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए पहले करीब दो किलोमीटर तक पैदल ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद ही किसी वाहन की सुविधा मिल पाती है।
तबीयत बिगड़ी तो गेड़ुवा भार में बैठाकर दो किलोमीटर ढोया
रविवार, 30 अगस्त को गांव की 24 वर्षीय वृंदावती देवी, पति गणेश सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। महिला की हालत गंभीर होने पर परिजन और ग्रामीण उन्हें तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला ले जाना चाहते थे। लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण निजी वाहन वहां तक नहीं पहुंच सका।
ऐसे में ग्रामीणों ने मजबूरी में वृंदावती देवी को गेड़ुवा भार में बैठाया और करीब दो किलोमीटर तक पैदल ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद निजी वाहन की व्यवस्था की गई और महिला को इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला ले जाया गया।
मरीज को इस तरह कंधों के सहारे सड़क तक ले जाने का दृश्य न सिर्फ ग्रामीणों की मजबूरी को उजागर करता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि आधुनिक विकास के दौर में आज भी गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों के कंधों का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है।
न सड़क, न बिजली, न समुचित पेयजल
ग्रामीण ब्रजनाथ सिंह ने बताया कि बेन्दवाकोना के लोग लंबे समय से सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
गांव में बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी डिबरी की रोशनी में रात गुजारने को मजबूर हैं। वहीं, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण डाड़ी-चुआं के पानी पर निर्भर हैं। गर्मी हो या बरसात, पानी की समस्या उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है।
बीमार पड़ने पर खाट या गेड़ुवा भार ही बनता है एंबुलेंस
ग्रामीणों के अनुसार सड़क के अभाव में सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को होती है। गांव में जब भी कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ता है, तो उसे खाट या गेड़ुवा भार के सहारे करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ता है।
मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद ही वाहन या एंबुलेंस की सुविधा मिल पाती है। कई बार वाहन की व्यवस्था में भी समय लग जाता है। ऐसे में आपात स्थिति में यह दूरी मरीज और अस्पताल के बीच बड़ी बाधा बन जाती है।
कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार
रामरेखा धाम संगठन के मंत्री सह समाजसेवी अशोक सिंह ने कहा कि बेन्दवाकोना गांव की समस्याओं से जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। ग्रामीण लंबे समय से गांव तक सड़क निर्माण, बिजली और पेयजल की स्थायी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नेता, मंत्री, विधायक, सांसद और विभागीय अधिकारियों का ध्यान गांव की समस्याओं की ओर आकृष्ट कराया गया। इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल
बेन्दवाकोना की यह तस्वीर ग्रामीण विकास के दावों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक ओर गांवों तक सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर एक गंभीर रूप से बीमार महिला को इलाज के लिए दो किलोमीटर तक गेड़ुवा भार में ढोकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बेन्दवाकोना गांव तक जल्द से जल्द सड़क का निर्माण कराया जाए। साथ ही बिजली और पेयजल की स्थायी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के लिए इस तरह कंधों और ग्रामीणों के सहारे अस्पताल तक पहुंचाने की मजबूरी न हो।
बेन्दवाकोना की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि उन ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत का आईना है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए विकास का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।


