सावन की अंतिम सोमवारी पर दुखहरण नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
गिरिडीह। सावन माह की चौथी और अंतिम सोमवारी पर टुंडी रोड स्थित उदनाबाद (अजीडीह) के प्राचीन बाबा दुखहरण नाथ मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अहले सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो दिन चढ़ने के साथ और भी बढ़ती चली गईं। जिले के विभिन्न प्रखंडों के साथ-साथ झारखंड के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने मंदिर के समीप बहने वाली उत्तरवाहिनी उसरी नदी से जल भरा और ‘बोल बम’ व ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ बाबा का जलाभिषेक किया। पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां हर कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करता नजर आया।
करीब 550 वर्ष पुराने इस प्राचीन शिव मंदिर की क्षेत्र में गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों के दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहां दुखहरण नाथ के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोग उन्हें ‘दुखिया महादेव’ कहकर पुकारते हैं।
मंदिर के पुजारी सर्वेश पांडेय ने बताया कि उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से, यानी दो सौ वर्षों से अधिक समय से यहां पूजा-अर्चना करता आ रहा है। सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर उन्होंने कहा कि सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई है। लोग धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर जलाभिषेक कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं और अपनी दुःखों को दूर करने के लिए बाबा से प्रार्थना करते हैं। पूरे दिन मंदिर परिसर बोल बम और हर हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

