विधानसभा में भू-सर्वे की बड़ी गड़बड़ी स्वीकार, 550 से अधिक भूमि विवाद लंबित
झारखंड विधानसभा में फिर गूंजा भू-सर्वे में गड़बड़ी का मामला, सरकार ने मानी बड़ी चूक | 550 से ज्यादा भूमि विवाद लंबित
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में एक बार फिर लातेहार जिले के भू-सर्वे में हुई गड़बड़ियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। मनिका विधानसभा के विधायक रामचंद्र सिंह ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से पूछा कि आखिर वर्षों पहले हुए सर्वे की त्रुटियों को अब तक क्यों नहीं सुधारा गया और पुनः सर्वे की प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं हो सकी।
इस सवाल के जवाब में सरकार ने जो जानकारी दी, उसने पूरे मामले की गंभीरता को सामने ला दिया। सरकार ने स्वीकार किया कि लातेहार जिले में हुए भू-सर्वे की त्रुटियों के कारण आज भी 550 से अधिक भूमि विवाद के मामले लंबित हैं। यानी सर्वे में हुई गलतियों का खामियाजा सीधे तौर पर आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कई परिवार अपनी जमीन के अधिकार को लेकर वर्षों से अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। सरकार ने विधानसभा में बताया कि वर्ष 2019 में दोबारा भू-सर्वे कराने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। हालांकि, उस समय पुनः सर्वे का कार्य आगे नहीं बढ़ सका। अब सरकार पुराने तरीके की बजाय आधुनिक तकनीक पर आधारित नई सर्वे व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार के अनुसार, नई सर्वे प्रणाली तैयार करने के लिए बिहार और केरल जैसे राज्यों के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड और अधिक सटीक माप के माध्यम से भविष्य में इस तरह की त्रुटियों से बचा जा सके। इसी दिशा में जून 2026 में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इस समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी और उसी के आधार पर नई सर्वे प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया जाएगा।
विधायक रामचंद्र सिंह ने सदन में इस बात पर भी चिंता जताई कि जब सर्वे की गलतियों को सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है, तो प्रभावित लोगों को राहत देने और लंबित मामलों के समाधान के लिए ठोस कदम जल्द उठाए जाने चाहिए। उनका कहना था कि वर्षों से हजारों लोग अपनी जमीन के रिकॉर्ड में सुधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और देरी से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
भूमि विवाद केवल कानूनी समस्या नहीं होते, बल्कि इनका सीधा असर किसानों, ग्रामीण परिवारों और विकास परियोजनाओं पर भी पड़ता है। कई मामलों में गलत रिकॉर्ड के कारण जमीन की खरीद-बिक्री, मुआवजा, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट अर्चना कुमारी।

