गुमला में ‘सेटेंग’ अभियान शुरू, अब कोई भी बच्चा शिक्षा से नहीं रहेगा वंचित
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा’ : गुमला में विशेष नामांकन अभियान ‘सेटेंग’ का शुभारंभ, 157 विद्यालयों में दो माह चलेगा महाअभियान
गुमला। जिले के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और विद्यालय छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुमला प्रशासन ने ‘सेटेंग’ (स्कूल से बाहर बच्चों के लिए विशेष नामांकन एवं सतत अनुश्रवण अभियान) की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर उनका पुनः नामांकन कराया जाएगा तथा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि वे नियमित रूप से विद्यालय आते रहें।
इसी को लेकर शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए सभी संबंधित विभागों एवं सहयोगी संस्थाओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने बताया कि 7 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक भरनो और घाघरा प्रखंड के 157 चिन्हित विद्यालयों में यह विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जो अब तक विद्यालय में नामांकित नहीं हैं अथवा किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके हैं। ऐसे सभी बच्चों को पुनः विद्यालयों में दाखिला दिलाकर उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े रहें।
उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन ने बताया कि यू-डायस 2025-26 की रिपोर्ट में सामने आए अधिक ड्रॉपआउट, कम प्रगति दर और नामांकन में कमी जैसे शैक्षणिक संकेतकों के आधार पर भरनो और घाघरा को उच्च प्राथमिकता वाले प्रखंड के रूप में चयनित किया गया है। अभियान के अंतर्गत घाघरा के 99 तथा भरनो के 58 विद्यालयों, यानी कुल 157 विद्यालयों को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षा विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि साझेदारी, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता पर आधारित व्यापक जनअभियान है। शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस), नियोजन विभाग, बाल कल्याण समिति तथा अन्य विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो ने कहा कि प्रखंड संसाधन केंद्र, संकुल संसाधन केंद्र, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी तथा स्वयंसेवी संस्थाएं आपसी समन्वय के साथ जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खान ने कहा कि शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का शिशु सदन तथा 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का विद्यालयों में नामांकन और ठहराव सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। अभियान के दौरान ऐसे सभी बच्चों की पहचान की जाएगी, जो कभी विद्यालय नहीं पहुंचे या किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। ऐसे बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में अपर समाहर्ता राजीव नीरज, जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो, जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खान, श्रम अधीक्षक धीरेन्द्र महतो, जिला नियोजन पदाधिकारी सत्येन्द्र महतो, जिला श्रम एवं नियोजन पदाधिकारी अनामिका तिर्की, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नेमंती तिग्गा, झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी के जिला कार्यक्रम प्रबंधक, समाज कल्याण विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रतिनिधियों सहित सभी संकुल साधन सेवी एवं प्रखंड साधन सेवी उपस्थित रहे।
बैठक में सीआईएनआई-टाटा ट्रस्ट, पिरामल फाउंडेशन तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अभियान में सक्रिय सहयोग का भरोसा दिलाया।
बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि “हर बच्चा विद्यालय में हो, यही हमारा संकल्प और यही इस अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना होगा।


