पांकी के लोहरसी में प्रशासनिक उदासीनता का शिकार दलित परिवार,जर्जर मकान में रहने को विवश विधवा, आधार कार्ड न होने से सरकारी योजनाएं दूर

पांकी के लोहरसी में प्रशासनिक उदासीनता का शिकार दलित परिवार,जर्जर मकान में रहने को विवश विधवा, आधार कार्ड न होने से सरकारी योजनाएं दूर

​पांकी
डिजिटल इंडिया और शत-प्रतिशत विकास के सरकारी दावों के बीच पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत लोहरसी गांव से एक अत्यंत विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक अत्यंत गरीब दलित परिवार आज के समय में भी बुनियादी सरकारी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि एक बेसहारा विधवा महिला का परिवार एक बेहद जर्जर और असुरक्षित मकान में रहने को मजबूर है,
​आधार कार्ड न होने से थमा विकास का पहिया
​हैरानी की बात यह है कि इस आधुनिक दौर में भी परिवार के कई सदस्यों का अब तक आधार कार्ड नहीं बन सका है। आज के समय में आधार कार्ड लगभग हर सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए पहली और अनिवार्य शर्त है। आधार कार्ड के अभाव में इस पीड़ित परिवार को महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है
​आधार न होने के कारण परिवार का राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है, जिससे उन्हें मुफ्त या सस्ते अनाज की सुविधा नहीं मिल रही है।
​ रहने के लिए पक्का मकान मिलना तो दूर, आवेदन की प्रक्रिया भी कागजी उलझनों में फंसी है।
​ विधवा होने के बावजूद महिला को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ फिलहाल नहीं मिल पा रहा है।
​जब रहने को सुरक्षित छत ही न हो और दो वक्त के दाने-दाने के लिए तरसना पड़े, तो ऐसे में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। मुखिया से लेकर प्रखंड प्रशासन तक, इस लाचार परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बरसात और आंधी-तूफान के दिनों में इस परिवार की स्थिति और भी खौफनाक हो जाती है। मिट्टी और खपरैल से बना यह मकान पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारें ढहने की कगार पर हैं और छत से पानी टपकता है।
इस संबंध में परिवार के सदस्य सूरज भुईया ने बताया कि इस घर में उनकी विधवा मां के अलावे उनके बड़े भाई मुकेश एवं उनकी पत्नी के अलावे बहन व अन्य लोग रहते हैं जिसमें उनका एवं उनके बड़े भाई मुकेश एवं उनकी एक बहन का आज तक आधार कार्ड नहीं बन पाया है जिससे उन्हें आज तक किसी तरह का सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है यही नहीं विधवा मां को भी किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है जिससे परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है, सूरज एवं मुकेश भुईया मेहनत मजदूरी कर घर के सदस्यों का पालन पोषण कर रहे हैं उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है।