नशा एक दीमक है, जो पूरा परिवार बर्बाद कर देती है”— थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार का बड़ा संदेश
नशा ऐसी दीमक है जो न केवल व्यक्ति के शरीर को खोखला करती है, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देती है:- थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार।
जागरूकता अभियान के दौरान राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय, नगर ऊंटारी में बोले उपेंद्र कुमार कि “नशा एक ऐसी दीमक है, जो न केवल व्यक्ति के शरीर को खोखला करती है, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देती है”। थाना प्रभारी ने कहा कि आज विशेषकर हमारी युवा पीढ़ी मादक पदार्थों की गिरफ्त में आ रही है। नशे की शुरुआत अक्सर शौक या दोस्तों के दबाव में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ऐसी जानलेवा लत बन जाती है जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है। नशा करने वाला व्यक्ति अपना शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संतुलन खो बैठता है। इसके कारण घर में तनाव, हिंसा और अलगाव की स्थिति पैदा होती है, जिससे मारपीट और हत्याएं तक की घटनाएं हो रही है। आगे उन्होंने कहा कि जब युवा नशे की राह पर चलते हैं, तो देश का भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है। नशामुक्ति केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें यह समझना होगा कि नशे से मुक्ति पाकर ही युवा एक विकसित और सशक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकते है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम खुद किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे और यदि हमारे आसपास कोई इस लत का शिकार है, तो हम उसका उपहास उड़ाने के बजाय उसे सही मार्गदर्शन देंगे और नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुँचाने में मदद करेंगे। हम अपने परिवार, दोस्तों और समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाएंगे। अंत में उन्होंने कहा “जन-जन का एक ही नारा, नशा-मुक्त हो समाज हमारा।” मादक पदार्थ से संबंधित शिकायत हेतु अपने नजदीकी थाना या डायल 112 पर कॉल कर सूचना दें। साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान के दौरान ट्रैफिक नियमों एवं बाल विवाह के बारे में भी जागरूक किया और कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों के बारे में उन्होंने बताया कि आज के समय में सड़कें केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि ये हमारी लापरवाही के कारण असुरक्षित होती जा रही हैं। भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण जल्दबाजी, नियमों की अनदेखी, शराब पीकर गाड़ी चलाना और मोबाइल का इस्तेमाल है। सबसे दुखद बात यह है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है।दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए उन्होंने कहा कि हमेशा तय गति सीमा में ही वाहन चलाएं, क्योंकि “गति रोमांच देती है, लेकिन जान भी ले सकती है”।सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें, दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले हेलमेट का इस्तेमाल करें और कार चलाते समय सीट बेल्ट जरूर लगाएं।नशे से बचें: कभी भी शराब या नशे की हालत में गाड़ी न चलाएं।मोबाइल से दूरी रखें गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन, ईयरफोन या मैसेजिंग का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।यातायात नियमों का पालन करें अर्थात हमेशा ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग और रोड साइन का सम्मान करें।सड़क सुरक्षा केवल यातायात पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही न सिर्फ आपका, बल्कि आपके परिवार का भी बहुत बड़ा नुकसान कर सकती है। वहीं, आपकी थोड़ी सी सतर्कता किसी की जान बचा सकती है। अंत में उन्होंने कहा कि”सावधानी हटी, दुर्घटना घटी” – इस मूल मंत्र को हमेशा याद रखें। सुरक्षित रहें और सुरक्षित यात्रा करें। तथा अंत में बाल विवाह के बारे में जागरूक करते हुए उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन एक अपराध भी है। हमारे देश में सदियों से चली आ रही यह कुरीति आज भी कई ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों, विशेषकर बच्चियों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। आगे कहा कि जब एक बच्चे की शादी कम उम्र में हो जाती है, तो उसके जीवन पर बहुत घातक प्रभाव पड़ते हैं।साथ ही शादी के बाद बच्चों, विशेषकर लड़कियों की पढ़ाई छूट जाती है और उनके सपने वहीँ दम तोड़ देते हैं। सकम उम्र में शादी और गर्भधारण से लड़कियों के शारीरिक स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुँचता है, जिससे मातृ मृत्यु दर और कुपोषण जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। जिन बच्चों को खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में होती है, उन पर घर-परिवार की ज़िम्मेदारियां डाल दी जाती हैं, जिससे उनका बचपन छिन जाता है। हमें यह समझना होगा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन एक अपराध भी है। ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम’ (Child Marriage Prohibition Act) के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी करना गैर-कानूनी है। यदि हम एक विकसित और सशक्त समाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें इस कुरीति को रोकना होगा। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपने आस-पास जागरूकता फैलाएं। यदि कहीं भी बाल विवाह हो रहा हो, तो हमें आगे आना चाहिए और पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर (1098) पर इसकी सूचना देनी चाहिए।अंत में उन्होंने कहा कि बच्चों की जगह स्कूल है, मंडप नहीं।




