35 साल बाद खुला बंद रास्ता, मुखिया शब्बीर आलम की पहल से ग्रामीणों में खुशी
35 वर्षों का इतिहास बदला: मुखिया शब्बीर आलम ने बंद रास्ते को दिलाई नई जिंदगी, जनता बोली — “ऐसा जनप्रतिनिधि पहली बार देखा”
गिरिडीह प्रखंड अंतर्गत तेलोडीह पंचायत में वह ऐतिहासिक कार्य हुआ है, जिसका इंतजार ग्रामीण पिछले लगभग 35 वर्षों से कर रहे थे। तेलोडीह मुख्य मार्ग से निजामनगर गांव जाने वाला महत्वपूर्ण रास्ता, जो दशकों से बंद पड़ा था, उसे आखिरकार पंचायत के कर्मठ, जुझारू और जनता के लिए 24 घंटे समर्पित रहने वाले मुखिया शब्बीर आलम की पहल पर खोल दिया गया।
यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों की वर्षों पुरानी उम्मीद, संघर्ष और सपनों की जीत मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते को खुलवाने में बड़े-बड़े लोग असफल रहे, उस कार्य को मुखिया शब्बीर आलम ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति, जनसंपर्क और लगातार मेहनत के दम पर संभव कर दिखाया।
ग्रामीण बताते हैं कि शब्बीर आलम दिन-रात पंचायत के विकास और जनता की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहते हैं। चाहे सड़क की समस्या हो, बिजली, पानी, जनगणना, गरीबों की सहायता या सामाजिक कार्य — हर मोर्चे पर मुखिया खुद मैदान में उतरकर लोगों के बीच दिखाई देते हैं। पंचायत के लोग कहते हैं कि “मुखिया नहीं, जनता के सच्चे सेवक हैं शब्बीर आलम।”
निजामनगर के ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से बंद इस रास्ते के कारण लोगों को बड़ी कठिनाईयों से आना-जाना पड़ता था। मरीजों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी होती थी। लेकिन अब इस रास्ते के खुल जाने से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोगों ने कहा कि यह कार्य आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा।
ग्रामीणों ने मुखिया शब्बीर आलम की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने साबित कर दिया कि अगर जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नीयत से काम करें तो पंचायत की तस्वीर बदली जा सकती है। जनता ने कहा कि शब्बीर आलम सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि साल के 365 दिन जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले नेता हैं।
इस ऐतिहासिक पहल के बाद तेलोडीह पंचायत में मुखिया शब्बीर आलम की कार्यशैली और नेतृत्व की चर्चा हर तरफ हो रही है। लोगों का कहना है कि पंचायत को ऐसा सक्रिय, संघर्षशील और जनता के प्रति समर्पित मुखिया मिलना पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य की बात है।

