पांकी के माड़न में कल्याण विभाग की योजना में की जा रही हेराफेरी, विभाग मौन
पांकी के माड़न में कल्याण विभाग की योजना में की जा रही हेराफेरी, विभाग मौन
देवस्थान को सरणा स्थल बनाकर किया जा रहा कार्य खुद अध्यक्ष ने की पुष्टि
मुखिया के आपत्ति के बाद कई महीने तक कार्य था बंद, कार्य फिर से हुआ शुरू चर्चा तेज
पांकी प्रखंड के माड़न पंचायत में कल्याण विभाग द्वारा संचालित कई योजनाओं में बड़े पैमाने पर हेरा फेरी करने का मामला प्रकाश में आया है प्राप्त जानकारी के अनुसार पांकी के माड़न में सरना स्थल चारदीवारी निर्माण का कार्य लगभग 25 लाख रुपए की लागत से पिछले ही वर्ष पूरा किया गया है, उक्त स्थल से लगभग 100 फीट की दूरी पर महदानी सरना स्थल का भी कार्य बीते वित्तीय वर्ष में लगभग 25 लाख की लागत से पिछले वर्ष शुरू किया गया था लेकिन पंचायत के मुखिया के द्वारा देवस्थल को फर्जी तरीके से सरना स्थल घोषित करने का मामला संबंध में विभाग को लिखित आवेदन भी दिया गया था इसके बाद कार्य बंद हो गया था, व भुगतान पर भी रोक लग चुका था।
मामले के लगभग डेढ़ वर्ष बीतने के बाद फिर से कार्य शुरू होने के बाद यह मामला तूल पकड़ लिया है, पूर्व के विवादित चार दिवारी पर ही फिर से चारदीवारी का कार्य जैसे तैसे पूरा किया जा रहा है
चार दिवारी के निर्माण कार्य में मानक को ताख पर रखकर घटिया सामग्री का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, निर्माण कार्य में चिमनी ईंट की जगह घटिया बंग्ला ईंट एवं स्थानीय नदी से मिट्टी युक्त बालू का उपयोग करने के साथ सीमेंट एवं सरिया मानक के अनुसार नहीं लगाया जा रहा है आपको बता दें की पूर्व के सरना स्थल से मात्र 100 मी की दूरी पर यह महदानी स्थल है जो देवस्थल है लेकिन कल्याण विभाग की आंख में धूल झोंककर उसे महदानी सरना स्थल कर दिया गया है ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक छोटे से गांव में दो स्थानों में वह भी मात्र 100मीटर की दूरी में आखिर दो सरणा स्थल का कार्य कैसे शुरू किया गया,
वहीं कार्य के दौरान मौके पर मौजूद लाभुक समिति के अध्यक्ष इंद्रदेव उरांव ने खुद इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह महदानी देवस्थल है जो सरना स्थल नहीं है।
आपको बता दें कि मुखिया के द्वारा पूर्व में यह बताया गया था कि बगैर मुखिया के हस्ताक्षर के ग्राम सभा कर देवस्थान को सरना स्थल घोषित किया गया था लेकिन फिर से कार्य शुरू होने से लोग हैरान हैं।
इस गंभीर मामले पर गांव के हिंदू समाज के लोगों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि यदि इस मामले की सघनता से जांच की जाए तो कई चेहरे बेनकाब होंगे, एवं धार्मिक स्थल के साथ छेड़छाड़ किए जाने वाले लोगों पर उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।

