पांकी के हुरलौंग पंचायत में मनरेगा के नाम पर ‘कागजी’ विकास, लाखों के गबन का आरोप
पांकी के हुरलौंग पंचायत में मनरेगा के नाम पर ‘कागजी’ विकास, लाखों के गबन का आरोप
पलामू जिले के पांकी प्रखंड अंतर्गत हुरलौंग पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना में भारी अनियमितता और वित्तीय गबन का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय ग्रामीणों और प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार, मनरेगा कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
धरातल पर काम नहीं, मस्टर रोल पर हाजिरी फुल
हुरलौंग पंचायत के विभिन्न गांवों से जो तस्वीरें और जानकारी सामने आ रही हैं, वे मनरेगा के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आरोप है कि कई ऐसी योजनाओं के नाम पर राशि की निकासी कर ली गई है, जो धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं हैं या फिर आधा-अधूरा काम कराकर उसे पूर्ण दिखा दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार सेवक और कनीय अभियंता (JE) की मिलीभगत से बिचौलिए सक्रिय हैं, जो फर्जी मस्टर रोल के जरिए गबन को अंजाम दे रहे हैं।
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि खाली पड़े या पुराने गड्ढों को नई योजना बताकर उनकी जीपीएस टैगिंग की जा रही है ताकि भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
मजदूरों का पलायन और हकमारी
एक तरफ सरकार ग्रामीण इलाकों में रोजगार सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों का बजट आवंटित कर रही है, वहीं हुरलौंग पंचायत में हो रहे इस भ्रष्टाचार के कारण जरूरतमंद मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस ‘लूट’ को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच की जाए, तो डोभा निर्माण, मेढ़बंदी व टीसीबी योजनाओं में बड़ी गड़बड़ी सामने आएगी।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिले के वरीय अधिकारियों से इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई होने तक वे इस मुद्दे को उठाएंगे ताकि गरीब मजदूरों का हक उन्हें मिल सके और सरकारी राशि की बंदरबांट रोकी जा सके।


