रहस्यमयी फरसे के दर्शन को टांगीनाथ धाम उमड़े श्रद्धालु, भक्ति भाव से मनाई परशुराम जयंती

रहस्यमयी फरसे के दर्शन को टांगीनाथ धाम उमड़े श्रद्धालु, भक्ति भाव से मनाई परशुराम जयंती

डुमरी (गुमला) – डुमरी प्रखंड स्थित प्राचीन एवं विख्यात टांगीनाथ धाम में भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सुबह से ही दूर-दराज़ गांवों और कस्बों से श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचते रहे। फूल-माला, नारियल और प्रसाद के साथ भक्तों ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। दिनभर मंदिर परिसर जयकारों और घंटियों की ध्वनि से गूंजता रहा।
आस्था का केंद्र: खुले आसमान के नीचे स्थापित रहस्यमयी फरसा
टांगीनाथ धाम का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत प्राचीन माना जाता है। यहां जमीन में गड़ा विशाल त्रिशूलनुमा फरसा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यह भगवान परशुराम का दिव्य शस्त्र है, जिसे उन्होंने यहीं स्थापित किया था। आश्चर्य की बात यह है कि खुले आसमान के नीचे धूप, बारिश और मौसम की मार झेलने के बावजूद इस धातु पर जंग के निशान नहीं दिखते—यह तथ्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए भी कौतूहल का विषय बना हुआ है।
गहराई का रहस्य और अधूरी खुदाई
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार 1980 के दशक में इसकी गहराई जानने के लिए खुदाई कराई गई थी। लगभग 15 फीट तक खुदाई के बाद भी इसका अंतिम छोर नहीं मिला, जिसके बाद कार्य रोक दिया गया। आज भी यह फरसा मंदिर के सामने खुले स्थान पर उसी अवस्था में स्थापित है।
खंडित अग्र भाग की पुनर्स्थापना
बताया जाता है कि करीब एक सदी पूर्व इसका एक अग्र भाग गायब हो गया था। हाल के वर्षों में वह हिस्सा छत्तीसगढ़ के एक गांव से वापस लाकर मंदिर परिसर में पुनर्स्थापित किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं
एक मान्यता के अनुसार, सीता स्वयंवर में शिव धनुष टूटने पर भगवान परशुराम क्रोधित हुए थे। बाद में जब उन्हें ज्ञात हुआ कि श्रीराम विष्णु के अवतार हैं, तो वे पश्चाताप करने इस स्थल पर आए और अपना फरसा गाड़कर तपस्या में लीन हो गए।
एक अन्य लोककथा में कहा जाता है कि भगवान शिव का त्रिशूल प्रहार इसी पहाड़ी पर आकर धंस गया, जिसे आज टांगीनाथ धाम के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय कथाओं में यह भी प्रचलित है कि प्राचीन काल में इस त्रिशूल/फरसे को क्षति पहुंचाने का प्रयास करने वालों को दैवी दंड मिला।
परशुराम जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। आस्था, इतिहास और रहस्य का अनूठा संगम बना टांगीनाथ धाम आज भी लोगों के विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।