*सेवा ही दिलाती है मोक्ष, निर्दोष कुमार उर्फ अकलू बाबा

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*सेवा ही दिलाती है मोक्ष, निर्दोष कुमार उर्फ अकलू बाबा
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व्यक्ति के अंदर सेवा एवं कर्तव्य के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए। सेवा प्रदाता को ही अपने अधिकार और अपनी जिम्मेदारी का ज्ञान होना चाहिए। जो भी संस्था अपनी कार्य प्रणाली को स्वस्थ रूप से संचालित करती है संस्था में कार्य करने वाले सेवक समय से अपनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए अनुशासित तरीके से समय सीमा में कार्य संपादित करते हैं जिससे घर से लेकर कार्यालय तक में व्यवस्था बनी रहती है। व्यक्ति समाज एवं समग्र राष्ट्र विकास के पथ पर गतिशील होता है। समस्त प्रकार के सेवा का फल मीठा होता है। जब वह मानव और समाज की भलाई के लिए किया गया हो। धार्मिक परिप्रेक्ष्य में सात्विक एवं निष्काम सेवा से व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है। आर्थिक परिप्रेक्ष्य में सच्ची सेवा से समाज धनी एवं सम्पन्न बनता है।
इस दुनिया में सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। सेवा चाहे व्यक्ति के रूप में हो या संस्था के रूप में, किसी भी समाज या राष्ट्र के विकास के रूप में। सेवा प्रदाता एवं सेवक का अहम योगदान है। यह सम्पूर्ण सृष्टि के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न प्रकार की सेवा पर आधारित है। सच्चे सेवा प्रदाता ईमानदार सेवक सभ्यता एवं संस्कृति के विकास के संवाहक हैं एवं व्यक्ति के साथ-साथ संपूर्ण समाज की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। सच्चे सेवकों एवं सेवा प्रदाताओं को उचित सम्मान एवं पुरस्कार मिलना चाहिए। जीवन के हर क्षेत्र में इनका अहम महत्व है। घर खेत-खलिहान, विद्यालय, कार्यालय, व्यावसायिक संगठन, कल-कारखाने, वैज्ञानिक प्रयोगशाला, धार्मिक एवं समाजिक संस्थाएं, चिकित्सा एवं विज्ञान घर से शुरू होकर किसी भी देश के उच्चतम शासन प्रणाली सासद तक हर कोई विभिन्न प्रकार के सेवा प्रदाता एवं सेवक के रूप में अपनी विभिन्न भूमिका निभाते हैं। सेवा प्रदाता एक संस्थागत रूप है। सेवक का संबंध व्यक्ति विशेष से है। सेवा का साधारण अर्थ है। दूसरों को ईश्वर का अंश मानते हुए भलाई का कार्य करना। हर व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि, अपने कर्मभूमि, समाज, देश के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए, उक्त बातें सतबरवा नारायण सेवा समिति के अध्यक्ष निर्दोष कुमार उर्फ अकलू बाबा ने आए सतबरवा प्रखंड के मेसो पंचायत रबदा के ग्राम खेमा खेमे में गरीब असहाय के बीच वस्त्र वितरण के दरमियान उन्होंने यह सब बातें कही।

 

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