सतबरवा में अकीदत और भाईचारे के साथ मनाई गई बकरीद, मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़
सतबरवा (पलामू): ईद-उल-अजहा (बकरीद) के पावन अवसर पर सतबरवा की जामा मस्जिद में सुबह 7:30 बजे तथा ताहा मस्जिद में 7:00 बजे सामूहिक नमाज अदा की गई। नमाज के बाद मस्जिद परिसर में खुशी का माहौल छा गया और लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी।
जामा मस्जिद में सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। पूरे इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और पुलिस के जवान मुस्तैदी के साथ तैनात रहे।
कुर्बानी का प्रतीक
इस्लाम धर्म में ईद-उल-अजहा को बलिदान और कुर्बानी का प्रतीक माना जाता है। इस दिन हजरत इब्राहिम (अ.) की अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण की याद में बकरे की कुर्बानी दी जाती है।
जामा मस्जिद के इमाम मौलाना तौफीक आलम मिस्बाही ने अपने संदेश में कहा,
“आज का यह दिन कुर्बानी का दिन है। यह हमें संदेश देता है कि हम केवल पशु की कुर्बानी न दें, बल्कि अपने अंदर छिपी बुराइयों, नफरत, घमंड और गुरूर की भी कुर्बानी दें। हम सबको मिल-जुलकर, मोहब्बत और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए।”
इमाम साहब ने आगे कहा कि कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए तथा ऐसा कोई कार्य न किया जाए जिससे अन्य समुदाय के लोगों को कोई तकलीफ पहुंचे। उन्होंने पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) का हवाला देते हुए कहा कि “किसी को तकलीफ देकर खुशी मनाना जायज नहीं है।”
मौजूद प्रमुख लोग
इस मौके पर शाहनवाज आलम, नौशाद आलम, मो. दिलनवाज आलम, मो. अताउल्लाह, ताहिर फिरोज, मो. अदनान अशरफ, मो. शमसाद खान, मो. मोजाहिद हुसैन, ताहा खान, बाबू खान, मो. समीर, मो. अनीस, मो. नासिर, सैफुल्लाह, राजा खान सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

