सिंघानी पंचायत भवन में मरम्मती कार्य पर उठे सवाल, मुखिया ने जताई नाराजगी

सिंघानी पंचायत भवन में मरम्मती कार्य पर उठे सवाल, मुखिया ने जताई नाराजगी

घटिया सामग्री और मनमानी ठेकेदारी से हो रहा डीएमएफटी फंड का दुरुपयोग, जांच की मांग तेज

चतरा (पत्थलगड़ा) : पत्थलगड़ा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायत भवनों में डीएमएफटी फंड से चल रहे मरम्मती कार्यों को लेकर भारी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। लगभग 25 लाख रुपये की लागत से हो रहे इन कार्यों में घटिया सामग्री, मनमाने ढंग से निर्माण और गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
सिंघानी पंचायत की मुखिया राधिका देवी ने इस पूरे मामले पर गंभीर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पंचायत भवन की मरम्मती का कार्य पूरी तरह मनमानी तरीके से किया जा रहा है। कई बार संवेदक को मौखिक और लिखित रूप से चेतावनी देने के बावजूद कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ है।
मुखिया राधिका देवी ने बताया कि मरम्मती कार्य में प्रयोग की जा रही सामग्री बेहद निम्न गुणवत्ता की है। रंग-रोगन, प्लास्टर, और फर्श सुधार जैसे कार्य सिर्फ औपचारिकता निभाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “यदि जांच हुई तो सच्चाई सामने आ जाएगी और यह साफ होगा कि सरकारी धन का कैसे दुरुपयोग हो रहा है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी तकनीकी निगरानी के ठेकेदार मनमाने ढंग से कार्य करा रहे हैं। अभियंता और विभागीय अधिकारी जमीनी निरीक्षण से परहेज़ कर रहे हैं, जिससे संवेदक को खुली छूट मिल गई है। पंचायतवासियों में भी इस कार्य को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व नोनगांव पंचायत भवन में हुई इसी तरह की अनियमितता को लेकर स्थानीय अखबारों में खबर प्रकाशित की गई थी। अब सिंघानी और मेराल पंचायत भवनों के मरम्मती कार्य पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 25 लाख रुपये की राशि का कार्य स्थल पर कहीं भी संतोषजनक परिणाम नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि एक ही संवेदक और उसके साझेदार द्वारा तीन पंचायत भवनों का कार्य संभाला गया है, जिससे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।
मुखिया राधिका देवी ने उपायुक्त (डीसी) से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा, “अगर विभागीय अधिकारी शीघ्र संज्ञान नहीं लेते, तो हम उपायुक्त महोदया को आवेदन देकर पूर्ण जांच की मांग करेंगे। सरकारी फंड से इस तरह लीपापोती कर काम करने वाले संवेदकों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है।”
ग्रामीणों ने भी जिला प्रशासन से अपील की है कि सिंघानी, मेराल और नोनगांव पंचायत भवनों के मरम्मती कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस बढ़ते जनाक्रोश और भ्रष्टाचार के आरोपों पर कब और कैसी कार्रवाई करता है — या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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