शादी के दो दिन बाद दर्दनाक हादसा: खुशियों भरे घर में छा गया मातम

शादी की रौनक और खुशियों की गूंज अभी घर आँगन में पूरी तरह थमी भी नहीं थी कि सोमवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। 29 नवंबर को जिस घर में शहनाई बज रही थी, जहाँ रिश्तेदारों की भीड़, आशीर्वादों की आवाज़ें और कैमरों की चमक थी आज उसी घर से चीख-पुकार,सिसकियाँ और टूटे दिलों की कराह सुनाई दी।
लालगढ़ पंजरी के मूल निवासी तथा वर्तमान में सुदना में रहने वाले राष्ट्रीय परशुराम सेना भार्गव के संस्थापक सदस्य राहुल पाठक की सड़क दुर्घटना में असामयिक मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को दुःख के अथाह सागर में डुबो दिया। राहुल पाठक, पंजरी निवासी मनोज पाठक के पुत्र थे। दो दिन पूर्व ही सिमडेगा निवासी बसंत मिश्रा की पुत्री नेहा कुमारी से उनका विवाह क्राउन प्लाजा में सम्पन्न हुआ था। नई जिंदगी की शुरुआत के सपने अभी आँखों में ही थे कि नियति ने अचानक सब छीन लिया।
घटना की जानकारी मिलते ही सदर अस्पताल में लोगों का ताँता लग गया। पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी,प्रदेश भाजपा महामंत्री मनोज कुमार सिंह,सनातनी धर्मरक्षक अर्जुन पाण्डेय,भाजपा जिलाध्यक्ष अमीत तिवारी,जिला महामंत्री ज्योति पाण्डेय,युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी,भाजपा वरिष्ठ नेता परशुराम ओझा,विभाकर नारायण पाण्डेय, सामाजिक कार्यकर्ता नवीन तिवारी, चंदन तिवारी,भाजपा आईटी सेल गढ़वा प्रभारी सह अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा अ के राष्ट्रीय सह प्रवक्ता धीरेन्द्र तिवारी उर्फ गुडडू गोवावल,सहित बड़ी संख्या में राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिनिधि अस्पताल पहुँचे। हर चेहरे पर गहरा सदमा था और आँखों में वही एक सवाल—“इतनी जल्दी क्यों…?”
अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। दो दिन पहले जहाँ दूल्हा-दुल्हन की मुस्कुराहटों के साथ तस्वीरें खिंच रही थीं, वहीं आज टूटी उम्मीदें, बिखरे सपने और दर्द से भरी सिसकियाँ हवा में तैर रही थीं।
दुर्घटना की खबर मिलते ही सीआरपीबीआरपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज शुक्ला, जिलाध्यक्ष किशोर दूबे,अविनाश पाण्डेय,भार्गव सेना के कमलेश शुक्ला, मुकेश तिवारी, मधुकर शुक्ला, अभिषेक तिवारी, आशुतोष तिवारी,युवा वाहिनी जिलाध्यक्ष मनीष ओझा, आर.के. चंदन,चंद्रशेखर छोटू,बंटी दूबे सहित क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

आज देर शाम हरिश्चंद्र घाट पर राहुल पाठक का दाह संस्कार किया गया, जहाँ शोक की चादर में लिपटा पूरा परिसर मौन होकर विदाई देता रहा।

यह हृदयविदारक दुर्घटना एक बार फिर यह अहसास करा गई कि ज़िंदगी बेहद नाज़ुक है—पल भर में खुशियाँ मातम में बदल सकती हैं। परिवार ही नहीं, पूरा समाज इस असमय बिछड़ने के दुख में डूबा है।