सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु समग्र कार्ययोजना पर होगा अमल : उपायुक्त
सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु समग्र कार्ययोजना पर होगा अमल : उपायुक्त
उपायुक्त श्री दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने पुलिस अधीक्षक ,पलामू श्री कपिल चौधरी के साथ पोखराहा खुर्द स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-39 एवं पांकी–मेदिनीनगर मार्ग के संगम (इंटरसेक्शन) का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जोड़ मार्ग (इंटरसेक्शन) का भी निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक सुधारात्मक उपायों का आकलन किया तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने कहा कि किसी भी सड़क दुर्घटना में होने वाली जनहानि केवल एक परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति होती है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है कि सड़क अभिकल्पना, यातायात प्रबंधन तथा आवश्यक सुरक्षा उपायों के माध्यम से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जाए तथा किसी भी व्यक्ति को मानवीय भूल अथवा तकनीकी कमियों के कारण अपने प्राण न गंवाने पड़ें।
उपायुक्त ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक को निर्देश दिया कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों एवं दोनों ओर के संगम स्थलों पर भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप चेतावनी संकेतक, दिशा-सूचक पट्ट, गति सीमा संबंधी सूचना पट्ट एवं परावर्तक सुरक्षा संकेत तत्काल लगाए जाएं।
उन्होंने संगम स्थल पर आधुनिक यातायात संकेत (ट्रैफिक सिग्नल) स्थापित करने का निर्देश देते हुए कहा कि दोनों दिशाओं में सुव्यवस्थित संकेत प्रणाली विकसित की जाए, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राज्य मार्ग से आने-जाने वाले वाहनों का आवागमन सुरक्षित, नियंत्रित एवं सुचारु रूप से संचालित हो सके।
उपायुक्त ने दृश्यता (विजिबिलिटी) बढ़ाने के लिए सड़क किनारे मौजूद अवरोधों को हटाने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्पष्ट सड़क चिह्नांकन (रोड मार्किंग), परावर्तक कैट्स-आई, चेतावनी पट्ट एवं अन्य आवश्यक सड़क सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देशित किया कि राज्य मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग में मिलने वाले ढलानदार संपर्क मार्गों (स्लांटिंग रोड) के ढाल (ग्रेडियंट) को तकनीकी मानकों के अनुरूप कम किया जाए, ताकि मुख्य मार्ग पर प्रवेश करने से पूर्व वाहनों की गति नियंत्रित रहे और तीव्र त्वरण के कारण दुर्घटना की संभावना उत्पन्न न हो।
उपायुक्त ने आवश्यक स्थानों पर गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) एवं पुलिस बैरिकेडिंग का वैज्ञानिक एवं उपयुक्त ढंग से निर्धारण करने का निर्देश दिया, जिससे यातायात का प्रभावी प्रबंधन हो तथा दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो।
उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक को निर्देश दिया कि स्थायी एवं दीर्घकालिक समाधान के लिए 10 जुलाई तक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) में आवश्यक संशोधन कर क्षेत्रीय कार्यालय को अनुमोदन हेतु भेजना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि संशोधित प्रतिवेदन में सड़क सुरक्षा अंकेक्षण (रोड सेफ्टी ऑडिट) की अनुशंसाओं, यातायात घनत्व, भविष्य की आवश्यकताओं तथा आधुनिक सड़क अभियांत्रिकी के सभी मानकों का समावेश किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। दुर्घटना संभावित स्थलों की नियमित समीक्षा की जाएगी तथा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक सुधारात्मक कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे कराए जाएंगे। उन्होंने आम नागरिकों से भी यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने तथा सड़क संकेतों का अनुपालन करने की अपील करते हुए कहा कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था प्रशासन और समाज, दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं अभियंता उपस्थित थे।

