रामपुर–परहाटोली सड़क और जर्जर पुल बना ग्रामीणों के लिए अभिशाप, सात साल से मरम्मत का इंतजार

रामपुर की सड़क और विश्रामपुर, नगरप्रतापुर को जोड़ने वाला पुल’ बना ग्रामीणों के लिए अभिशाप

रामप्रवेश गुप्ता

गड्ढों में तब्दील रामपुर–परहाटोली मार्ग, करीब 7 वर्षों से जर्जर पुल पर नहीं हुई मरम्मत—हर रात हादसे का डर

ग्रामीणों की दो टूक—अब कागजी आश्वासन नहीं, सड़क और पुल का तत्काल निर्माण चाहिए

महुआदांड़। प्रखंड मुख्यालय से रामपुर होते हुए परहाटोली तक जाने वाली सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्षों से जर्जर इस मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश का जलजमाव लोगों के लिए जानलेवा परेशानी बन चुके हैं। इसी मार्ग पर स्थित एक पुल की हालत भी करीब सात वर्षों से बेहद खराब बताई जा रही है। ग्रामीण इसे अब ‘मौत का पुल’ कहने लगे हैं।स्थिति यह है कि दिन में किसी तरह लोग गड्ढों और टूटे हिस्सों से बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात होते ही यह रास्ता हादसे के खतरे में बदल जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, पुल और सड़क की बदहाल स्थिति के कारण रात में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। बावजूद इसके अब तक पुल के पुनर्निर्माण या सड़क के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में भारी आक्रोश है।

सड़क पर गड्ढे या गड्ढों में सड़क?

रामपुर–परहाटोली मार्ग की हालत इतनी खराब है कि राहगीरों को हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता विशेष रूप से खतरनाक बना हुआ है।स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भी इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली अब सुविधा का नहीं, सीधे सुरक्षा और जिंदगी का सवाल बन चुकी है।

करीब 7 साल से ‘मौत का पुल’, आखिर किसका इंतजार?

इसी मार्ग में स्थित जर्जर पुल ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल करीब सात वर्षों से बदहाल है, लेकिन अब तक इसके पुनर्निर्माण की ठोस पहल नहीं हुई। पुल की खराब स्थिति के कारण रात में आवागमन बेहद जोखिम भरा हो जाता है।ग्रामीणों का आरोप है कि हर रात दुर्घटना का खतरा बना रहता है और कई हादसे हो भी रहे हैं, फिर भी जिम्मेदार विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा या उससे पहले ही पुल का निर्माण कराया जाएगा?

राम जायसवाल—पंचायत फंड से इतनी बड़ी सड़क-पुल बनाना संभव नहीं

स्थानीय जनप्रतिनिधि राम जायसवाल ने कहा कि पंचायत फंड से इतनी बड़ी सड़क और पुल का निर्माण कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग कई गांवों को जोड़ता है और इसके लिए बड़े स्तर पर राशि की आवश्यकता है।उन्होंने सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से तत्काल सड़क एवं पुल निर्माण कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं, इसलिए अब मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना चाहिए।

आलोक कुमार की हुंकार—‘सड़क और पुल नहीं बना तो आवाज और बुलंद होगी’

युवा समाजसेवी आलोक कुमार ने सड़क और पुल की बदहाली पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह सिर्फ गड्ढों वाली सड़क नहीं है, यह ग्रामीणों की जिंदगी का सवाल है। करीब सात साल से पुल बदहाल है। रात में लोग डर के साए में इस रास्ते से गुजरते हैं। आखिर प्रशासन कब जागेगा?”उन्होंने कहा कि अब आश्वासन नहीं, सड़क और पुल दोनों चाहिए। सांसद, विधायक और जिला प्रशासन तत्काल स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य शुरू कराएं।आलोक कुमार ने कहा, “किसी की जान जाने के बाद कार्रवाई का इंतजार नहीं किया जा सकता। जब समस्या सामने है तो समाधान भी तत्काल होना चाहिए। ग्रामीणों की आवाज को दबाया नहीं जाएगा। जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”

भरत राम—‘हर रात परिवार को सताता है हादसे का डर’

भाजपा कार्यकर्ता भरत राम ने कहा कि जर्जर सड़क और पुल ने ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि रात में इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को हर समय दुर्घटना का डर सताता है।उन्होंने कहा, “हमारे बच्चे और ग्रामीण इसी रास्ते से गुजरते हैं। अगर रात में कोई वाहन गड्ढे या पुल के टूटे हिस्से में फंस जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। आखिर कब तक ग्रामीण डर के बीच सफर करेंगे?उन्होंने प्रशासन से सड़क और पुल की तत्काल मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की मांग की।

प्रेम पाण्डेय—‘जर्जर पुल किसी बड़े हादसे का इंतजार न बने’

JLKM सदस्य प्रेम पाण्डेय ने कहा कि करीब सात वर्षों से जर्जर पुल को लेकर तत्काल गंभीरता दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी पुल का वर्षों तक बदहाल रहना अपने आप में व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।उन्होंने कहा कि प्रशासन को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए और ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे लोगों की जान जोखिम में न पड़े। उन्होंने सड़क और पुल दोनों के स्थायी निर्माण की मांग की।

जसवंत यादव—‘ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद हो’

समाजसेवी जसवंत यादव ने कहा कि सड़क और पुल की हालत देखकर ग्रामीणों का दर्द साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि बारिश में सड़क पर पानी और गड्ढे, जबकि पुल की जर्जर स्थिति लोगों के लिए दोहरी मुसीबत बन चुकी है उन्होंने कहा, “जिस रास्ते से मरीज अस्पताल जाते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं और ग्रामीण रोजी-रोटी के लिए निकलते हैं, उसी रास्ते को वर्षों से बदहाल छोड़ देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।”उन्होंने सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों की दो टूक—‘अब सड़क-पुल नहीं तो चुनाव में जवाब’

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे सड़क और पुल के निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है।ग्रामीणों ने सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से सड़क एवं जर्जर पुल का तत्काल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ठोस पहल नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए मजबूर होंगे और आगामी चुनाव में बहिष्कार जैसे कदम पर भी विचार किया जा सकता है।

सबसे बड़ा सवाल—सात साल से जर्जर पुल आखिर कब बनेगा?

रामपुर–परहाटोली सड़क और जर्जर पुल अब सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा और जिंदगी का सवाल बन चुका है। ग्रामीणों की निगाहें अब सांसद, विधायक और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यही है—क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा या उससे पहले ही ‘मौत के पुल’ और बदहाल सड़क का स्थायी समाधान किया जाएगा?