पत्थलगड़ा में मजदूरों की मजदूरी अटकी, प्रधान सहायक पर कमीशन मांगने का आरोप; डीसी से जांच की मांग
पत्थलगड़ा में मजदूरों की मजदूरी पर कुंडली, प्रधान सहायक पर कमीशन मांगने का आरोप; उपायुक्त रवि आनंद से निष्पक्ष जांच की मांग
दो-तीन महीने से भुगतान के लिए भटक रहे जी राम जी के मजदूर, बीपीओ ने भी फाइल रोकने पर उठाए सवाल; बीडीओ ने जल्द भुगतान का दिया भरोसा
चतरा (पत्थलगड़ा) : पत्थलगड़ा प्रखंड कार्यालय में जी राम जी योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान दो से तीन महीने से लंबित रहने और प्रधान सहायक पर कथित रूप से कमीशन मांगने का गंभीर मामला सामने आया है। प्रखंड क्षेत्र की पांच पंचायतों के दर्जनों मजदूर अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए कभी प्रखंड कार्यालय तो कभी संबंधित कर्मियों के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। शनिवार को परेशान मजदूरों ने प्रखंड कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत रखी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।मजदूरों की शिकायत ने प्रखंड कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मजदूरी के लिए भटक रहे श्रमिक, कमीशन मांगने का आरोप:
मजदूरों ने बताया कि जी राम जी योजना के तहत काम करने के बाद उन्हें निर्धारित समय पर मजदूरी मिलने की उम्मीद थी। योजना में 15 दिनों के भीतर भुगतान का प्रावधान बताया गया था, लेकिन दो से तीन महीने बीत जाने के बाद भी राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। लगातार पूछताछ के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि भुगतान से संबंधित फाइलें प्रधान सहायक के पास लंबित हैं। मजदूरों का आरोप है कि जब उन्होंने भुगतान के संबंध में उनसे बात की तो कथित तौर पर कुछ प्रतिशत राशि अथवा कमीशन की मांग की गई। इससे नाराज मजदूरों ने मामले को सार्वजनिक करते हुए उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।
बीपीओ ने भी उठाए सवाल, फाइल आगे नहीं बढ़ने का आरोप:
प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके स्तर से भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर सभी आवश्यक दस्तावेज आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिए गए हैं। मजदूरों से कमीशन मांगने की शिकायत उन्हें भी मिली है। उन्होंने कहा कि उनसे भी इशारों में पैसे को लेकर बात की गई थी। 14 अक्टूबर को जिला स्तरीय बैठक में भुगतान से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई थी, जिसका अनुपालन उनके स्तर से कर दिया गया है। इसके बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक दस्तावेज और आवंटन पत्र की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन संबंधित स्तर से फाइल आगे नहीं भेजी जा रही है। इस समस्या से उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी अवगत कराया है। उनका कहना है कि जी राम जी योजना के विभागीय पदाधिकारी होने के बावजूद कई फाइलें उनके टेबल तक नहीं पहुंचती हैं। ऐसे में गंभीर चिंता का विषय है।
मुखिया व प्रतिनिधियों के साथ राजद अध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी:
मामले को लेकर सिंघानी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि संजय दांगी, नावाडीह पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मेघन दांगी, नोनगांव पंचायत की मुखिया कुमारी संगीता सिंहा, बरवाडीह पंचायत के मुखिया संदीप सुमन तथा राजद प्रखंड अध्यक्ष रामजीत दांगी से भी बातचीत की गई। सबने बताया कि सभी पांचों पंचायत के मजदूरों को भी मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। करीब दस दिन पहले पूछताछ करने पर दो-तीन दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज भेजकर भुगतान कराने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की मजदूरी का भुगतान समय पर कराना प्रखंड प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी कर्मी द्वारा कमीशन की मांग की गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए।
बीडीओ ने जल्द भुगतान का दिया आश्वासन:
मजदूरों की शिकायत और भुगतान में हो रही देरी को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी उदल राम से भी बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि भुगतान से संबंधित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। जल्द ही मजदूरों को उनकी बकाया राशि का भुगतान कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने कमिशन से संबंधित लोगों को बताया कि अगर इस तरह की बात सामने आती है तो मुझे लिखित रूप से आवेदन दे मैं उस पर कठोर कार्रवाई करूंगा।
उपायुक्त रवि आनंद से बाहरी टीम गठित कर जांच कराने की मांग:
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बीपीओ अपने स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने की बात कह रहे हैं और बीडीओ भी जल्द भुगतान का आश्वासन दे रहे हैं, तो आखिर मजदूरों की फाइल दो-तीन महीने से लंबित क्यों है? प्रधान सहायक पर कमीशन मांगने के आरोपों की सच्चाई क्या है और भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर रुकी हुई है? मजदूरों ने उपायुक्त रवि आनंद से मामले को गंभीरता से लेते हुए बाहरी जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित मजदूरों, जनप्रतिनिधियों और कर्मियों से पूछताछ कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी मजदूर को अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए कमीशन देने को मजबूर न होना पड़े।

