प्रशासन के इंतजार में नहीं बैठे ग्रामीण, श्रमदान से टूटे पुलिया पर बनाया वैकल्पिक रास्ता
प्रशासन के इंतजार में नहीं बैठे ग्रामीण, श्रमदान से टूटे पुलिया पर बनाया वैकल्पिक रास्ता
महुआडांड़। प्रखंड अंतर्गत राजडंडा गांव में पुल टूटने से उत्पन्न आवागमन की समस्या के बीच ग्रामीणों ने मिसाल पेश की है। प्रशासन की पहल का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर श्रमदान किया और टूटे पुलिया पर पत्थर, मिट्टी और बालू भरकर छोटे वाहनों के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार कर दिया।
पुल टूटने के कारण राजडंडा गांव समेत आसपास के इलाकों के लोगों का प्रखंड मुख्यालय और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया था। ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 10 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। इससे लोगों का समय और ईंधन दोनों अधिक खर्च हो रहे थे।
आवागमन की समस्या का सबसे अधिक असर दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, मरीजों और अन्य यात्रियों पर पड़ रहा था। परेशानी को देखते हुए राजडंडा गांव के युवकों, स्कूली बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर श्रमदान करने का निर्णय लिया।
इसके बाद सभी ने मिलकर टूटे पुल के हिस्से में पत्थर, मिट्टी और बालू डालकर रास्ता तैयार किया। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से फिलहाल इस रास्ते से छोटे वाहनों का आवागमन संभव हो सका है और लोगों को तत्काल राहत मिली है।
ग्रामीणों की इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीणों की एकजुटता और सामूहिक प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक है।
हालांकि, बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर इस अस्थायी रास्ते के दोबारा क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से राजडंडा पुल की जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्रवासियों को लंबे समय तक आवागमन की समस्या से जूझना न पड़े।




