नक्सली हमले के 10 साल बाद भी स्कूल भवन नहीं बना, बरामदे में पढ़ते 168 बच्चे
नक्सली हमले के 10 साल बाद भी हेरहंज के ‘सेरनदाग’ स्कूल को नसीब नहीं हुआ भवन, बरामदे में पढ़ाई करने को मजबूर नौनिहाल
डिजिटल शिक्षा के दावों के बीच जमीनी सच, जर्जर कमरों और टपकती छत के साए में लातेहार के बच्चों का भविष्य
लातेहार, हेरहंज
एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और डिजिटल क्लासरूम के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर लातेहार जिले के सुदूरवर्ती हेरहंज प्रखंड स्थित ‘राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सेरनदाग’ प्रशासनिक अनदेखी का दंश झेल रहा है। नक्सलियों द्वारा विद्यालय भवन को क्षतिग्रस्त किए जाने के करीब 10 साल बीत जाने के बाद भी यहां नए भवन का निर्माण नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि 168 मासूम बच्चे धूप और बारिश के बीच बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
10 अक्टूबर 2015 की घटना- नक्सलियों ने रात में हमला कर विद्यालय भवन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था।
168 नामांकित विद्यार्थियों के लिए महज 3 जर्जर कमरे बचे हैं।
बरसात में छत से पानी टपकने के कारण कक्षाओं का संचालन बरामदे में करना पड़ता है।
प्रधानाध्यापक द्वारा कई बार पत्राचार के बावजूद विभाग अब तक सोया हुआ है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक ब्रह्मदेव गंझु ने बताया कि 10 अक्टूबर 2015 की रात नक्सलियों ने हमला कर विद्यालय के मुख्य भवन को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस घटना को 10 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शासन और प्रशासन ने आज तक न तो भवन का पुनर्निर्माण कराया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की।
टपकती छत और हादसों का खौफ; बरामदा ही बना क्लासरूम
विद्यालय में वर्तमान में केवल तीन कमरे ही बचे हैं, जिनकी स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है।
हादसे को न्योता: बरसात के दिनों में छतों से लगातार पानी टपकता है, जिससे कमरों के अंदर बैठना जानलेवा साबित हो सकता है।
तेज धूप और बारिश, दोनों ही स्थितियों में शिक्षकों के पास बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
168 बच्चों का भविष्य 4 शिक्षकों के कंधों पर
इस सुदूरवर्ती क्षेत्र के मध्य विद्यालय में कुल 168 विद्यार्थी नामांकित हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए 4 शिक्षक पदस्थापित हैं। शिक्षकों की मौजूदगी के बावजूद कमरों के अभाव में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। एक ही बरामदे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाना पड़ता है, जिससे बच्चों का ध्यान भटकता है।
प्रधानाध्यापक के अनुसार, विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से स्थिति से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन नतीजा आज तक शून्य ही रहा।
विभाग की इस उदासीनता से स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने लातेहार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अविलंब नए भवन की स्वीकृति देने की मांग की है, ताकि इन बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।



