मलय डैम में घटिया निर्माण कार्य पैसे का हुआ बंदरबाट जांच जरूरी-भाकपा

मलय डैम में घटिया निर्माण कार्य पैसे का हुआ बंदरबाट जांच जरूरी-भाकपा

भाजपा जिला सचिव रूचिर तिवारी ने लिखा पलामू उपायुक्त क्त को पत्र

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव सह डालटेनगंज विस के पूर्व विधायक उम्मीदवार रूचिर कुमार तिवारी ने मलय नहर के टूट जाने पर उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाया है और उन्होंने इस संबंध में पलामू उपायुक्त को पत्र लिखकर इस पर जांच कर दोषी व्यक्तियों को जेल भेजना एवं भुक्तभोगी किसानों को मुआवजा देने की मांग किया है श्री तिवारी ने पत्र में कहा कि मलय नहर पक्की कारण योजना का काम 160 करोड़ की लागत से शुरू हुआ बाद में इसका मूल्य वृद्धि कर 200 करोड़ कर दिया गया । जिसे कमलादिव्या कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी को काम दिया गया जो बिहार में ब्लैकलिस्टेड था। फिर भी उसे झारखंड का सबसे बड़ा काम दिया गया। कंपनी स्वयं काम ना करके छोटे-छोटे ठेकेदारों में काम को बांट दिया जिससे बरसात से नहर टूटने लगा और उसे हमेशा मरम्मत किया जाने लगा। गैर मतलब है कि पूरे नहर का पक्की करण नहीं हुआ और रेड़मा से सिंगरा आज भी नहर पक्की करण नहीं हुआ। नहर का पक्की करण के नाम पर सीमेंट का लेप लगाकर अधिकारी अभियंता एवं संवेदक पैसा का बंदर बांट कर लिए यह काम जल पथ प्रमंडल मेदिनी नगर के अधीन कराया गया था। और मलय डैम में गेट लगाने और उसके देखरेख के लिए मैकेनिकल डिविजन मंडल के द्वारा
किया जाता है वह डिवीजन भी लूट के मामले में इसे पीछे नहीं है। मैकेनिक डिवीजन ने भी टेंडर के माध्यम से मलय डैम का गेट 2017 में लगभग 50 लाख के लागत से बनाया पुनः 2022में मैकेनिकल डिविजन के द्वारा पानी रिसाव रोकने के नाम पर लगभग 70 लाख की लागत से गेट बदलने के नाम पर खाना पूर्ति किया गया परंतु पानी का रिसाव नहीं रुका परिणाम स्वरूप नहर तो बह ही गया हजारों एकड़ में लगा धान का फसल भी बर्बाद हो गया मलम नहर से सतबरवा लेसलीगंज एवं सदर के लगभग 25 गांव का खेत पड़ता है और उसका हाल यह है कि जल पथ प्रमंडल कहता है कि गेट पानी नहीं रोक सका इसके चलते नहर टूट गया जबकि नहर का पक्की कारण ही सही ढंग से नहीं हुआ और निर्माण के एक वर्ष के अंदर ही नहर टूटने लगा।