मानसरोवर तालाब की साफ़-सफाई और सौंदर्यीकरण की मांग हुई तेज, समिति ने महापौर से तत्काल सफाई की लगाई गुहार

मानसरोवर तालाब की साफ़-सफाई और सौंदर्यीकरण की मांग हुई तेज, समिति ने महापौर से तत्काल सफाई की लगाई गुहार

गिरिडीह। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक मानसरोवर तालाब पर बढ़ते कचरे और अनियंत्रित झाड़ियों ने तालाब की शोभा खो दी है। स्थानीय निवासी और तालाब किनारे सीरियल भ्रमण करने वाले लोग सुबह-शाम गंदगी व बदहाल रास्तों से परेशान हैं।

सन 1973 स्थापित से यह तालाब शहर का एक ऐतिहासिक स्थल रहा है, जहाँ साल भर पूजा-पाठ और विशेषकर मूर्ति विसर्जन के बाद पूजा-सामग्री व अन्य कचरा तालाब किनारों पर जमा हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले आठ माह से तालाब की नियमित सफाई नहीं हुई, जिससे तालाब के पिन्तु (किनारों) के पास लम्बी झाड़ियाँ फैल गई हैं और पानी व आसपास का परिवेश दूषित दिखाई देता है।
मानसरोवर समिति के सदस्यों ने बताया कि हालिया श्री दुर्गा विसर्जन तथा अन्य धार्मिक आयोजनों के बाद कचरे का स्तर बढ़ गया है और समिति द्वारा कई बार नगर निगम से सफाई कराने की अपील की जा चुकी है, मगर कुछ कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद समिति के सदस्यों ने महापौर को लिखित आवेदन दिया है जिसमें तालाब की तुरंत सफाई व सौन्दर्यीकरण की मांग की गई है।

स्थानीय निवासियों ने कहा कि तालाब के किनारे बच्चों और बुजुर्गों के बैठने की जगहें गंदगी में डूब रही हैं तथा मातम-पूजा के बाद छोड़ा गया प्लास्टिक, फूल-पत्तियाँ व सजावटी सामान पानी व किनारों में जमा होकर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर तालाब की नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई और विसर्जन के बाद सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करने की मांग की है।