मां की ममता पुण्य कलश है, जीवन ज्योत है, अमृत रस है : डॉ. पातंजली

मां की ममता पुण्य कलश है, जीवन ज्योत है, अमृत रस है : डॉ. पातंजली
मातृत्व दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन
गढ़वा । लायंस क्लब ऑफ गढ़वा ग्रीन के तत्वावधान में शहर के नवादा मोड़ स्थित बंधन मैरेज हॉल में रविवार को मदर्स डे के मौके पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । इस दौरान माता और पिता दोनों की भूमिका अदा करने वाली मां सुनीता केशरी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने मां की ममता और महता पर प्रकाश डाला । साथ ही अपने जीवन के अमूल्य धरोहर स्वरूप इस अटूट रिश्ते को संरक्षित रखने की बात कही । इस दौरान कई लोगों ने मां के नहीं रहने पर होनेवाले वियोग के पल और साथ बिताए गए सुख – दुख को भी साझा किया ।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए आर.पी. एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के निदेशक सह भाजपा नेता डॉक्टर पातंजली केशरी ने कहा कि मां जगत धात्री है । इनसे संसार की रचना हुई है । मां की ममता पुण्य कलश है । जिसमें जीवन ज्योत है, अमृत रस है । उन्होंने कहा कि युग आते रहेंगे, जाते रहेंगे । कालचक्र चलता रहेगा लेकिन सभी रिश्तो में मां जैसे महान रिश्ते की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है । भगवान राम, कृष्ण ने भी पृथ्वी पर अवतरित होने के बाद मां के समक्ष एक अबोध बालक बनकर प्यार पाया है और इसे मानव जीवन के लिए उपयोगी बताया है । उन्होंने कहा कि बिते 30 अप्रैल को जबलपुर में घटित नाव दुर्घटना मां की ममता का ज्वलंत उदाहरण है ।जब मां की गोद से चिपका चार वर्षीय बालक और मां का पार्थिव शरीर निकला तो जबलपुर ही नहीं पूरे देश के लोग मर्माहत हो गए थे । सभी की आंखें नम हो गई थी । एक मां ने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को खुद से जुदा नहीं होने दिया । बड़े-बड़े ज्ञानी, साधु, संत, तपस्वी और ऋषियों ने भी मां को ईश्वर के समान माना है ।
रविंद्र जायसवाल ने कहा कि अपने जीवन के प्रारंभिक काल से ही मां के प्रति प्रेम के साथ सम्मान और आदर का भाव रखना चाहिए । ममता की प्रतिमूर्ति के साथ प्रथम गुरु मां ही होती है, इसलिए बच्चे जब भी स्कूल जाएं प्रतिदिन अपनी मां का चरण स्पर्श जरूर करें । साथ ही उन्होंने माताओं से अपील करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में बच्चों के जीवन में मोबाइल अपना खास स्थान बना लिया है । इस दौरान बच्चों की उचित देखभाल की जरूरत है । उनकी परवरिश संस्कारयुक्त करें ताकि बच्चे अपने माता-पिता, घर, समाज और देश का नाम रोशन कर सकें।
अमित कश्यप ने कहा कि माई के दुलार का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता है । उनकी दुआओं और प्यार की छत्रछाया में जो सुकून मिलता है वह जन्नत से कम नहीं है। मां स्वयं कड़ी धूप सहकर भी अपने बच्चों को शीतलता प्रदान करती है । आज पियूष केशरी गढ़वा के एक सफल कपड़ा व्यवसायी के रूप में जाने जाते हैं। इन्हें सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से एक सफल इंसान बनाने में इनकी मां सुनीता केशरी का महत्वपूर्ण योगदान है । हम सभी को इस तरह से कार्य करने वाली महिला को प्रेरित और सम्मानित करना चाहिए ।
मौके पर पार्वती सिंह, संगीता जायसवाल, खुशबू सोनी, गजाला सिद्दिकी, विजय सोनी, आनंद कुमार, संतोष अग्रवाल, आशुतोष अग्रवाल, विनय कश्यप, सोनू सिंह, दिलीप अग्रवाल, रमेश कुमार, दिव्य प्रकाश, मनोज संसाई, उमाकांत पाण्डेय, जयशंकर ब्रेजियर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।