झारखंड आंदोलनकारी बाबा झगरू पंडित की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, अविनाश देव ने संघर्ष और योगदान को किया याद

झारखंड आंदोलन के संघर्षशील पुरोधा बाबा झगरू पंडित की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, संघर्ष और योगदान को किया गया याद

मेदिनीनगर | 4 नवंबर

झारखंड आंदोलन के संघर्षशील सेनानी एवं जनाधिकारों की लड़ाई के अग्रणी साथी बाबा झगरू पंडित जी की पुण्यतिथि पर आज झारखंड माटी कला बोर्ड के पलामू प्रमंडलीय कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर झारखंड सरकार के माटी कला बोर्ड के निवर्तमान सदस्य सह झामुमो के युवा नेता माननीय श्री अविनाश देव ने उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया तथा उनके संघर्षपूर्ण जीवन, त्याग और योगदान को याद किया।

सभा को संबोधित करते हुए श्री अविनाश देव ने कहा कि बाबा झगरू पंडित झारखंड आंदोलन के अग्रणी सेनानियों में से एक थे। वे दिशोम गुरु शिबू सोरेन के करीबी सहयोगियों में शामिल थे और अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि झारखंड का निर्माण किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि अनगिनत आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग, समर्पण और जनभागीदारी का प्रतिफल है। बाबा झगरू पंडित जैसे समर्पित सेनानियों ने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।

महाजनी प्रथा के विरोध, जमीन के अधिकार और सामाजिक जागरूकता की लड़ाई से जुड़ा रहा संघर्ष

बाबा झगरू पंडित का संघर्ष केवल अलग राज्य की मांग तक सीमित नहीं था। उनके जीवन से जुड़े विवरणों में महाजनी प्रथा के विरोध, शोषित-वंचित लोगों के अधिकार तथा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता के प्रबल प्रयासों का भी उनके जीवन का हिस्सा रहा है। वे उन जमीनी कार्यकर्ताओं में शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन को गांवों और आम लोगों के बीच मजबूती प्रदान की। वे शिबू सोरेन के आंदोलन से जुड़े उन साथियों में थे, जिन्होंने संथाल परगना में संगठन और जनजागरण के कार्यों में सहभागिता निभाई।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ उनके संघर्षपूर्ण संबंधों को याद करते हुए यह भी कहा गया कि झारखंड आंदोलन की ताकत उसके समर्पित जमीनी कार्यकर्ता थे। शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो और कॉमरेड ए.के. राय जैसे नेताओं के नेतृत्व और विभिन्न आंदोलनकारियों की भागीदारी से झारखंड मुक्ति मोर्चा को राजनीतिक मंच मिला तथा अलग राज्य की मांग को व्यापक पहचान मिली। 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

श्री अविनाश देव ने कहा कि आज जरूरत है बाबा झगरू पंडित जी और झारखंड आंदोलन के महान सेनानियों के दिखाए रास्ते पर चलने की, ताकि हमारा समाज शिक्षित, संगठित, सशक्त और स्वावलंबी बन सके। विशेषकर कुम्हार समाज सहित सभी वंचित और मेहनतकश वर्गों को शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक सम्मान के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सामूहिक प्रयास करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

श्रद्धांजलि सभा में झारखंड कुम्हार समन्वय समिति के लल्लन प्रजापति, माटी कला बोर्ड के कार्यालय प्रभारी शोभा प्रजापति, विनोद प्रजापति, संतोष प्रजापति, माले के रविंद्र भुइयां, रामखेलावन प्रजापति, आईसा के अध्यक्ष अंशु कुमार, सहकारिता के मोहन प्रजापति सहित बड़ी संख्या में गणमान्य एवं समाज के लोग उपस्थित रहे। सभी ने बाबा झगरू पंडित जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

संघर्ष की विरासत, सम्मान की जिम्मेदारी

बाबा झगरू पंडित जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि समाज और राज्य का इतिहास केवल बड़े पदों पर बैठे लोगों से नहीं, बल्कि उन समर्पित कार्यकर्ताओं से भी बनता है, जो कठिन परिस्थितियों में अपने उद्देश्य के लिए डटे रहते हैं। उनके योगदान को याद रखना और आने वाली पीढ़ियों तक उनकी संघर्षगाथा पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।

बाबा झगरू पंडित जी अमर रहें।
झारखंड आंदोलन के सभी वीर सेनानियों को शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।