जांच पर जांच, फैसला अब भी अधूरा; महीनों से न्याय की राह देख रही सहायिका लीला सिन्हा

जांच पर जांच, फैसला अब भी अधूरा; महीनों से न्याय की राह देख रही सहायिका लीला सिन्हा

जनता दरबार से लेकर उपायुक्त के निर्देश तक, फिर बीडीओ की जांच और डीडीसी की समीक्षा; इसके बावजूद अंतिम निर्णय नहीं, ड्यूटी कर रही सहायिका की हाजिरी पर रोक से उठ रहे गंभीर सवाल

चतरा (इटखोरी) : इटखोरी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र रजवार की सहायिका लीला सिन्हा का मामला अब केवल ड्यूटी बहाली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया की गति और समयबद्ध कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जनता दरबार में आवेदन देने, लगातार विभिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने तथा जिला प्रशासन द्वारा संज्ञान लेने के बावजूद पीड़िता आज भी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रही है।

उपायुक्त ने दिए थे जांच के निर्देश

बीटेक 4 सप्ताह पूर्व पत्रकारों से बातचीत में उपायुक्त रवि आनंद ने कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है तथा जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई का भरोसा भी दिया था।

बीडीओ ने की जांच, रिपोर्ट भेजने की कही बात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपायुक्त के निर्देश पर इटखोरी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ने पीड़िता के दस्तावेजों की जांच की। बाद में उन्होंने बताया कि जांच प्रतिवेदन जिला मुख्यालय भेज दिया गया है। पीड़िता का कहना है कि जांच के दौरान उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र जाकर कार्य करने को कहा गया, जिसके बाद से वह नियमित रूप से केंद्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

ड्यूटी कर रहीं, फिर भी हाजिरी नहीं

लीला सिन्हा का कहना है कि वह लगातार केंद्र में उपस्थित होकर कार्य कर रही हैं, लेकिन उनकी हाजिरी अब भी दर्ज नहीं की जा रही है। उनके अनुसार, उन्हें बताया जाता है कि सीडीपीओ एवं पर्यवेक्षिका कार्यालय से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

डीडीसी बोले- जांच पूरी नहीं हो सकी

मंगलवार को जब उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है तथा उन्होंने अपना प्रभार भी सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि मामले में आगे नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं उपायुक्त रवि आनंद से भी संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

पीड़िता की भावुक अपील

भावुक होकर लीला सिन्हा ने कहा, “यदि मैं गलत हूं तो मुझे लिखित आदेश देकर सेवा से हटा दिया जाए। लेकिन यदि मैं सही हूं तो मुझे न्याय दिया जाए, मेरी ड्यूटी नियमित की जाए तथा जिन महीनों तक मुझे कार्य से दूर रखा गया, उस अवधि के मानदेय पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जाए।”
उन्होंने कहा कि वह कई महीनों से मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं, लेकिन आज भी जिला प्रशासन और सरकार से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं।

जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे लगातार सवाल

इस मामले में पूर्व में कुछ आंगनबाड़ी कर्मियों ने सीडीपीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक है, ताकि सभी पक्षों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

लगातार सबकी निगाहें प्रशासन पर

लगातार प्रकाशित हो रही खबरों, जांच की विभिन्न प्रक्रियाओं और पीड़िता की लगातार न्याय की गुहार के बावजूद अंतिम निर्णय लंबित है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जांच कब पूरी होगी, प्रशासन अपना अंतिम निर्णय कब देगा और महीनों से न्याय की प्रतीक्षा कर रही सहायिका लीला सिन्हा को आखिरकार राहत कब मिलेगी।