गढ़वा में रामकथा का छठा दिन: राम वनवास प्रसंग सुन भावुक हुए श्रोता, विनोद पाठक बोले—रामचरित मानस में हर समस्या का समाधान

श्रीरामचरित मानस में सभी समस्याओं का समाधान है : विनोद पाठक

श्रीरामकथा में राम वनवास प्रसंग को सुनकर भावुक हो गये श्रोता

गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में रामकथा का छठा दिन

गढ़वा : बड़ों की इच्छा का सम्मान करते हुये उसका पालन करना और एक-दूसरे के प्रति त्याग व प्रेम का भाव किसी भी आदर्श परिवार की नींव होती है. यह सबकुछ अयोध्या के चक्रवर्ती राजा दशरथ के परिवार में देखने को मिलती है, जिस परिवार में प्रभु श्रीराम का अवतार हुआ. श्रीरामचरित मानस में बड़ा ही इसका सुंदर चित्रण किया गया है. यही कारण है कि सदियों से श्रीरामचरित मानस का घर-घर में गायन होता आ रहा है, फिर भी इसकी लोकप्रियता में कमी नहीं हुई. रामकथा का श्रवण और इसका अनुकरण जितना वर्षों पूर्व प्रासंगिक था, उतना ही आज भी प्रासंगिक है. यह बात गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने कही. वे शारदीय नवरात्रि पर आयोजित गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में शुक्रवार की शाम रामकथा सुना रहे थे. उन्होंने कहा कि यदि हम आज प्रभु राम के चरित्र का अनुशरण कर लें, तो चाहे व्यक्तिगत हो, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय अथवा वैश्विक सभी समस्याओं का समाधान हो जायेगा. उन्होंने कहा कि चाहे आदर्श गृहस्थ जीवन की बात हो, आदर्श पारिवारिक जीवन की, आदर्श पतिव्रत धर्म की, आदर्श भातृ धर्म की अथवा आदर्श राजधर्म की, सबकुछ रामकथा में मिल जाता है. यहां परिवार में एक-दूसरे के प्रति प्रेम भी है और त्याग भी. श्रीराम को माता-पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये चक्रवर्ती राज्य अयोध्या का त्याग कर वनवास जाने में जरा भी दुख नहीं हुआ, उन्होंने तुरंत सहर्ष स्वीकार कर लिया. वनवास काल में उन्होंने पंपा नगरी में बालि को मारकर सुग्रीव को राजा बना दिया. इसी तरह से लंका में रावण को मारकर विभिषण को राजा बना दिया. उन्होंने कभी साम्राज्य विस्तार की नीति नहीं अपनायी. श्री पाठक ने रामकथा के दौरान प्रभु राम के वनवास के दौरान माता कौशल्या, सीताजी, भाई लक्ष्मण, लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला आदि के त्याग और संस्कार पर विस्तार से रामचरित मानस की चौपाईयों का गायन करते हुये रोचक ढंग से प्रकाश डाला.

कथा की सार्थकता राम के आदर्श को अपनाने से ही होगी : अलखनाथ पांडेय

शुक्रवार को कथा का उद्घाटन समाजसेवी सह शिक्षाविद अलखनाथ पांडेय ने अखंड दीप जलाकर एवं देवपूजन कर किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज चारो ओर अनीति, बेईमानी, झूठ व फरेबी बढ़ चुकी है. इससे लोग त्रस्त हैं. हर जगह आस्था का संकट दिखता है. ऐसे में रामकथा की ज्यादा प्रासंगिकता है. लेकिन श्रीरामकथा आयोजन की सार्थकता तभी होगी, जब हम राम के आदर्शों का अनुशरण करेंगे. उन्होंने कल्याणपुर के युवाओं की प्रशंसा किया कि वे नवरात्रि पर एक नेक कार्य कर रहे हैं. ऐसे कार्यों में वे हमेशा सहयोग करेंगे. इस अवसर पर शिवपूजन मेहता ने अपने भजन से वातावरण को रोमांचित बनाने का कार्य किया. इसमें सह गायक उपेंद्र शर्मा, बैंजो पर रंजीत विश्वकर्मा, ढोलक पर नंदू ठाकुर और झाल पर अशोक विश्वकर्मा व अभिषेक ठाकुर ने सहयोग किया. कथा में काफी संख्या में महिला-पुरूष श्रोता उपस्थित थे.

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