गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में रामकथा, विनोद पाठक बोले—स्वयंवर योग्य वर चुनने की श्रेष्ठ परंपरा थी

प्राचीन काल में स्वयंबर कन्या योग्य वर ढ़ूढ़ने की श्रेष्ठ प्रथा थी : विनोद पाठक

गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में आयोजित रामकथा में धनुष यज्ञ प्रसंग पर चर्चा

गढ़वा : प्राचीन काल में स्वयंबर कन्या योग्य वर का चयन करने की एक श्रेष्ठ परंपरा थी. राजा जनक द्वारा धनुष यज्ञ का आयोजन इसी परंपरा के तहत किया गया था. राजा जनक को माता जानकी के विवाह के लिये योग्य वर का चयन एक बड़ी चिंता थी. जानकीजी के लिये उन्हें साहसी और वीर पुरूष की तलाश थी. इसकी उद्देश्य के तहत जनकजी ने धनुष यज्ञ का आयोजन कर यह शर्त रखी थी कि जो भी राजा या राजकुमार शंकरजी की धनुष को तोड़ेगा, सीता उसे के गले में वरमाला डालेगी. यह बात गायत्री परिवार के विनोद पाठक् ने कही. वे गुरूवार की शाम गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में रामकथा सुना रहे थे. उन्होंने धनुष यज्ञ के प्रसंग को सुनाते हुये कहा कि धनुष यज्ञ के आयोजन से तब के राजाओं का घमंड भी टूटा. सीताजी के स्वयंबर में प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण तो मुनि विश्वामित्र के साथ एक दर्शक की भांति उपस्थित थे. स्वयंबर में जब आमंत्रित सभी राजा धनुष तोड़ने से असमर्थ हो गये, तब विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम ने धनुष तोड़ा. उठहू राम भंजहू भव चापा, मेटहू तात जनक परितापा… चौपाई की व्याख्या करते हुये श्री पाठक ने कहा कि विश्वामित्रजी ने राम को धनुष को तोड़कर जनकजी की पीड़ा को दूर करने को कहा था. इसलिये कि जनकजी ने सीताजी के विवाह के लिये जो कठिन शर्त रख दी थी, उसके उस समय के आमंत्रित सभी राजा पूरा करने में असमर्थ हो चुके थे. इसके कारण जनकजी निराश होकर काफी तनाव में हो गये थे. यदि कोई स्वयंबर की शर्त को पूरा नहीं करता, तो सीता का विवाह नहीं हो सकता था. उन्होंने कहा कि यद्यपि सीता मां जगदंबा की अवतार थी, उनका विवाह तो भगवान श्रीराम से ही होना निश्चित था. लेकिन मानव रूप में उन्हें सारी भूमिका लोक परंपरा के अनुसार ही करनी थी. अंतत: रामजी ने धनुष तोड़कर जनकजी की प्रतिज्ञा को पूरा किया और सीता के साथ उनका विवाह हुआ. कथा के दौरान शिवपूजन व्यास ने धनुष यज्ञ और राम विवाह से संबंधित भजन की प्रस्तुति कर श्रोताओं को भाव विभोर कर डाला. उनके साथ सह गायक उपेंद्र शर्मा, अशोक विश्वकर्मा, रंजीत विश्वकर्मा, नंदू ठाकुर, अभिषेक ठाकुर आदि ने सहयोग किया. कथा का संचालन मिथिलेश कुशवाहा ने किया. इस अवसर पर काफी संख्या में महिला-पुरूष श्रोता उपस्थित थे.

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